तोता सिंह ने तोड़ा था घाटी का गुरूर
डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
आधुनिक मशीनें और बारूद के धमाके ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे की तोताघाटी में फौलादी चट्टानों पर बेअसर साबित हो रहे हैं। लेकिन, नब्बे साल पहले प्रतापनगर निवासी ठेकेदार तोता सिंह रांगड़ की जीवटता ने इन्हीं मजबूत चट्टानों को काटकर तोताघाटी में सड़क तैयार की थी।
तब धन की कमी आड़े आने पर तोता सिंह ने न सिर्फ अपनी पूरी जमा-पूंजी चट्टानें काटने में खर्च कर दी थी, बल्कि पत्नी के जेवर तक बेच डाले थे। उनकी इस जीवटता से खुश होकर टिहरी रियासत के तत्कालीन राजा नरेंद्र शाह ने घाटी का नाम तोताघाटी रखने के आदेश दिए थे।इन दिनों ऑलवेदर रोड निर्माण के तहत ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर तोताघाटी की विशालकाय चट्टानें अत्याधुनिक मशीनों की भी परीक्षा ले रही हैं। सात माह तक पसीना बहाने के बाद एनएच यहां जैसे-तैसे हाईवे को खोल पाया है। लेकिन, नब्बे साल पहले प्रतापनगर के ठेकेदार तोता सिंह रांगड़ ने रस्सी और सब्बल की मदद से इस चट्टानी पहाड़ को चुनौती देने का साहस दिखाया था। तोता सिंह के नाती मेहरबान सिंह रांगड़ के अनुसार दादा उन्हें बताते थे कि शिवपुरी से आगे मजबूत चट्टानी घाटी होने के कारण कोई भी ठेकेदार वहां काम करने को तैयार नहीं था। टिहरी के राजा नरेंद्र शाह ने दादा को चांदी के 50 सिक्के देकर सड़क काटने को कहा तो वह तैयार हो गए। उन्होंने प्रतापनगर के रौणिया गांव से करीब 50 ग्रामीण साथ लिए और चट्टान काटने के लिए निकल पड़े। इस कार्य में लगभग 70 हजार चांदी के सिक्के खर्च हुए। जिसकी भरपाई दादा को घर की सारी जमा-पूंजी और दादी रूपदेई के जेवर बेचकर की। चट्टान काटने का कार्य वर्ष 1931 में शुरू हुआ और इसमें पूरे डेढ़ वर्ष लगे।
वर्ष 1935 में जब देवप्रयाग तक सड़क बनकर तैयार हो गई तो दादा ने राजा से कहा कि उन्हें इस काम में भारी नुकसान हुआ है। इस पर राजा नरेंद्र शाह ने दादा को न सिर्फ जमीन दान में दी, बल्कि घाटी का नामकरण भी उनके नाम पर कर दिया। राजा ने दादा को ‘लाट साहब’ की उपाधि भी प्रदान की थी। तोताघाटी में ऑलवेदर रोड का काम चलने के कारण इन दिनों मीडिया पर तोताघाटी में ठेकेदार तोता सिंह की मूर्ति लगाने की मुहिम चल रही है। तोता सिंह के स्वजनों का भी कहना है कि तोताघाटी में उनकी मूर्ति लगाने के अलावा एक हवाघर भी बनाया जाना चाहिए। ताकि, भविष्य की पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके। तोताघाटी में ऑलवेदर रोड का काम चलने के कारण इन दिनों सोशल मीडिया पर तोताघाटी में ठेकेदार तोता सिंह की मूर्ति लगाने की मुहिम चल रही है। तोता सिंह के स्वजनों का भी कहना है कि तोताघाटी में उनकी मूर्ति लगाने के अलावा एक हवाघर भी बनाया जाना चाहिए। ताकि, भविष्य की पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके। तोताघाटी में मैसिव स्टोन की बिना परत वाली चट्टानें है। बिना परत की चट्टानें बेहद मजबूत होती हैं, इसलिए उन्हें तोड़ने को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं। जबकि, परत वाली चट्टानें आसानी से टूट जाती हैं। टिहरी रियासत के तत्कालीन राजा नरेंद्र शाह ने उनको बुलावा भेजा। बताते हैं कि तोता सिंह, तब अपनी ठेकेदारी के काम में इतने व्यस्त थे कि उन्होंने राजा के निमंत्रण पर गौर ही नहीं किया। कई बार बुलाने के बाद वह दरबार में गए।
बताते हैं कि तब राजा ने नाराजगी जताई और कहा कि आप तो बहुत लाट साहब बन रहे हैं। तोता सिंह ने अपने गांव जाकर यह किस्सा लोगों को सुनाया और फिर लोगों ने उनका नाम ‘लाट साहब’ ही रख दिया। उनके नाती एमएस रांगड़ बताते हैं कि जब राजा को पता चला कि तोता घाटी में सड़क बनाते वक्त घाटा हो गया तो राजा नरेंद्र शाह ने उन्हें नरेंद्रनगर में काफी जमीन दिलाई। तब तोता सिंह अपने गांव से नरेंद्र नगर आकर बस गए। उसके बाद और आज भी इस परिवार की राज परिवार से नजदीकी रही। 86 साल की उम्र में ठेकेदार तोता सिंह का निधन हो गया था। ठेकेदार तोता सिंह रांगण की आदमकद प्रतिमा लगाई जाए। जिन्होंने दशकों पहले तोतघाटी के दुर्गम पहाड़ों को काटकर वहां सड़क बनवाई थी। तोता सिंह रांगण की आदमकद मूर्ति लगती आलवैदर रोड़ बनने के बाद ऋषिकेश से आगे फर्राटे भरते हुए जब आप लोग देवप्रयाग और व्यासी के बीच जाते हैं तब इस राजमार्ग पर जगह आती है ‘तोता घाटी’। इस जगह आज भी गाड़ी को संभलकर चलाना पड़ता है। जानते हैं इस जगह का नाम तोता घाटी क्यों पड़ा? आज से 94 वर्ष पूर्व ठेकेदार तोता सिंह रागड़ ने कठोर चट्टान वाली इस घाटी में 1931 में बदरीनाथ केदारनाथ मार्ग निर्माण कार्य आरम्भ और 1935 में यहां सड़क बन कर पूरी हो सकी हुई। तोता सिंह रांगड़ प्रताप नगर के रहने वाले थे, 94 वर्ष पूर्व यहां अति कठोर चट्टान थी इन कठोर चट्टानों को काटकर सड़क बनाई गई। तब यह कार्य हाथ के उपकरणों से चट्टान तोड़ कर किया गया। आज जब ऑल वेदर रोड बनी तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के ठेकेदारों के जो सबसे अधिक तोते उड़े वो इसी जगह पर काल कलवित हुए। कई मशीनें क्षति ग्रस्त हुई और मार्ग चौड़ीकरण में महीनों लग गए। आज इतनी भारी भरकम मशीनें जिस कार्य को कठिनता से कर सकी तो सोचिए जब तोता सिंह नाम के व्यक्ति ने सब्बल गैंती फावड़े कुदाल से सड़क का निर्माण किया होगा तब कितनी कठिनाईयों का सामना किया होगा! क्योंकि तब तो हमारे पास आधुनिक मशीनें नहीं थी आधुनिक उपकरण नही थे तब कैसे सड़क बनानी संभव हुई होगी? झारखंड के ‘दशरथ मांझी’ ने अपनी पत्नी जिसे नित्य चाड़ा पाहन जाकर पानी लाना पड़ता था उन्होंने चट्टान काट कर समलत मार्ग बनाया और वहां छ माह में कुआं तैयार किया। उन पर फिल्म भी बनी उन्हें दुनियाभर के लोग जानते हैं। लेकिन जिन तोतासिंह रांगड़ ने दशरथ मांझी से बहुत बड़ा कार्य किया पांच वर्ष रात दिन एक कर तोता घाटी की कठोर चट्टान काट कर श्रध्दालुओं के लिए बदरीनाथ केदारनाथ ्मोटर मार्ग सुलभ किया उन्हें कितने लोग जानते हैं? । लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

रानीखेत इंटर कॉलेज के पूर्व छात्र गौरव तिवारी द्वारा विद्यालय में सभी कमरों की टूटी खिड़कियों में लगवाए गए फाइबर शीशे