सेना की आए दिन की बाड़ बंदी से नागरिक हलकान, उच्च अदालत जाने का मन बना रहे हैं नागरिक

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रानीखेत – छावनी नगर में सेना की बाड़बंदी से परेशान नागरिकों में प्रशासन और छावनी परिषद को लेकर भी नाराज़गी देखी जा रही है। क्षुब्ध नागरिकों ने अब अपनी परेशानी बताने के लिए उच्च अदालत में अर्जी लगाने का मन बनाया है।

बता दें कि मौजूदा वक्त में नागरिकों की नाराज़गी रानीखेत- मालरोड -चौबटिया मोटर मार्ग को गाहे बेगाहे प्रतिबंधित किए जाने को लेकर है। इससे पूर्व ऐसा ही गुस्सा गोल्फ कोर्स की तारबंदी एवं प्रवेश निषेध को लेकर देखा गया था। जो अब भी कायम है। दिसंबर 2024में छावनी परिषद में सेना के सुझाव पर बोर्ड के फैसले के बाद रानीखेत -मालरोड -चौबटिया मोटर मार्ग में सेना प्रशिक्षण के नाम पर कुछ श्रेणी के वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया जबकि आजादी के बाद नागरिक आबादी के लिए ऐसा प्रतिबंध कभी नहीं रहा।हां,आजादी पूर्व गोरों ने इस इलाके को भारतीयों के चलने फिरने के लिए समयकाल के लिए निषिद्ध जरुर किया था। सेना ने इस मोटर मार्ग पर सैनिक प्रशिक्षण का हवाला देते हुए ऐसा किया है जबकि इस मोटर मार्ग पर क्रास कंट्री दौड़ अभ्यास की बात सामने आई है जो की छावनी परिषद के अन्य लिंक मार्ग जो कि ट्रैफिक शून्य है वहां भी कराया जा सकता था, मसलन नेहरू रोड, रानी झील मार्ग , सोमनाथ ग्रांउड राय स्टेट की ऊपरी सड़क आदि।

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सनद रहे , इससे पूर्व स्थानीय सेना प्रशासन ऐसी ही बाड़बंदी रानीखेत अल्मोडा़ राज मार्ग पर प्रातः समय सोमनाथ ग्रांउड से घिंघारीखाल के मध्य दौड़ अभ्यास के नाम पर करता रहा है। वाकया 2014का जब इस प्रतिबंध में चुनाव ड्यूटी प्रशिक्षण के लिए जा रहे कुछ शिक्षक भी फंस गए थे जिनकी बंदूकधारी संतरियों से बहस भी हुई थी और फिर उन्होंने जिला प्रशासन को दूरभाष से इसकी सूचना भी दी थी। घंटे डेढ़ घंटे के ऐसे प्रतिबंध में तब स्कूली बसें, द्वाराहाट चौखुटिया से लाए जा रहे बीमार मरीजों के वाहन भी फंसे रहते थे।ये सिलसिला लम्बा चला लेकिन सेना प्रशासन असंवेदनशील बना रहा। उसका नागरिकों के प्रति असंवेदनशील रवैया आज भी कायम है, बस मार्ग बदल गया है। इसके अलावा गोल्फ कोर्स में संतरियों की सैलानियों और स्थानीय नागरिकों के साथ बदसलूकी के पुराने किस्से भी सेना की किसी नई ज्यादती के साथ हरे हो उठते हैं।

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कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अतुल जोशी का कहना है कि पर्यटन नगरी का व्यवसाय पहले ही घट रहा है,रही सही कसर सेना द्वारा सड़क प्रतिबंधित करने से पूरी हो जाएगी। जब सड़कें बंदूकों के साये में दे दी जाएंगी तो सैलानी आखिर यहां क्यों आएगा? सैलानी स्वच्छंद घूमना पसंद करते हैं , यहां उन्हें कुछ वर्ष पूर्व के कश्मीर में घूमने की अनुभूति नहीं होनी चाहिए। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय प्रकाश पांडे का कहना है सेना की कथित ज्यादती से जुड़े सवालों को नागरिक अधिकारों के एंगल से देखा जाना चाहिए, नागरिक प्रशासन को भी लंबे समय तक नागरिकों की पीड़ा और चिंता की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और तत्काल समाधान निकालना चाहिए। सबसे अच्छी बात यह होगी कि ऐसे हालात बनाएं जाएं जिसमें नागरिक जीवन में फौज के दैनंदिन हस्तक्षेप की नौबत ही न आए। 

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फिलवक्त नागरिकों की नाराज़गी स्थानीय सेना प्रशासन, नागरिक प्रशासन और छावनी परिषद से है। युवाओं के‌ एक वर्ग ने इस बार शीघ्र नागरिक बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है जिसमें उच्च अदालत के दरवाजे पर दस्तक देने का फैसला लिया जा सकता है।