*अंधेरगर्दी की छावनी* देखो, कैण्ट सीईओ साहब, आपके कर्मचारी ने तो सरकारी आवास को ही दुकान में बदल दिया।

ख़बर शेयर करें -

रानीखेत: छावनी परिषद अपने अजब -गजब कारनामों के लिए चर्चा में रहता आया है और अगर अधिकारी शिथिल हो तो कर्मचारियों की बे-लगामी पर लगाम लगा पाना थोड़ा मुश्किल जरूर हो जाता है।नया कारनामा एक दुस्साहसी कर्मचारी ने कर दिखाया है जिसने सरकारी आवास में ही दुकान सजा डाली है। क्या सरकारी आवास का व्यवसायिक उपयोग हो सकता है? छावनी परिषद में इस सवाल पर ऊपर से नीचे तक ठंडी खामोशी पसरी है।

यह भी पढ़ें 👉  ताडी़खेत में आयोजित चार दिवसीय विधानसभा स्तरीय खेल महाकुंभ प्रतियोगिता में अल्मियाकाडे न्याय पंचायत ने जीती चैंपियनशिप ट्राफी

दरअसल, छावनी परिषद में अच्छा- खासा वेतन आहरित करने‌ वाले एक कर्मचारी ने सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के निकट सरकारी आवास का दुरूपयोग करते हुए उसके एक हिस्से को बुटीक एवं ब्यूटी सैलून में तब्दील कर दिया है। जबकि केंद्रीय सिविल सेवा (प्रचार) नियम, 1964 के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी न व्यवसाय कर सकता है न इस हेतु सरकारी साधन का दुरूपयोग। लेकिन रानीखेत छावनी परिषद में अदने से कर्मचारी से‌ लेकर शीर्ष अधिकारी तक सबके संज्ञान में मामला होने के बावजूद सब खामोशी अख्तियार किए हुए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  राष्ट्रीय युवा दिवस 12जनवरी को भाजयुमो करेगी रानीखेत नगर में स्वदेशी संकल्प दौड़ 2026का आयोजन

बता दें कि ये वही छावनी परिषद है जो किसी फड़ खोखा दुकान स्वामी के आधा फीट भी सामान बाहर‌ दिखने पर अपने ट्रक में लाद ले जाते हैं,अब जब छावनी परिषद कर्मचारियों द्वारा सरकारी आवासों को व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में तब्दील करने का श्री गणेश हो चुका है, क्या छावनी परिषद के जनता के बीच अलोप रहने वाले मुख्य अधिशासी अधिकारी अपने ही विभाग में कार्रवाई का चाबुक तलाशेंगे!

यह भी पढ़ें 👉  राष्ट्रीय युवा दिवस 12जनवरी को भाजयुमो करेगी रानीखेत नगर में स्वदेशी संकल्प दौड़ 2026का आयोजन
Ad Ad