शहीद चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन, दोनों बेटियों ने दी‌ मुखाग्नि,शोक संवेदना व्यक्त करने‌ सीएम भी पहुंचे

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सियाचिन में शहीद चंद्रशेखर हर्बोला के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया, जहां उनके भाई और दोनों बेटियों ने उनको मुखाग्नि दी इससे पहले उनका पार्थिव शरीर डहरिया, धानमिल स्थित उनके आवास पर पहुंचा। जहां राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, जिले की प्रभारी मंत्री रेखा आर्य, सैनिक कल्याण गणेश जोशी, कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, डीएम नैनीताल धीराज गर्भयाल, एसएसपी पंकज भट्ट, एसडीएम मनीष कुमार समेत क्षेत्र के लोगों ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।

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हल्द्वानी के डहरिया निवासी सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान आए एवलॉन्च में शहीद हुए लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर उनके घर पर पहुंचा। पार्थिव शरीर के घर पर पहुंचते ही पूरा माहौल गमगीन सा हो गया, शहीद चंद्रशेखर हर्बोला की पत्नी शांति देवी अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर रो पड़ी और उस समय का माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया, वहां मौजूद तमाम लोगों की आंखों में गम के आंसू तो शहीद की शहादत पर गर्व देखने को मिला। दरअसल 29 मई 1984 को सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान लांसनायक चंद्रशेखर हरबोला एवलॉंच में शहीद हो गए थे और 38 साल बाद सेना ने उनके पार्थिव शरीर को खोज निकाला है और आज उनके आवास पर सेना जब पार्थिव शरीर लेकर पहुंची। तो वहां मौजूद हजारों की संख्या में लोगों ने शहीद चंद्रशेखर तेरा यह बलिदान याद रखेगा हिंदुस्तान के नाम से गुंजायमान हुआ।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए पहुंचे इस दौरान उन्होंने कहा शहीद चंद्रशेखर को हमेशा याद रखा जाएगा और देश के लिए बलिदान करने वाले उत्तराखंड के वीर शहीदों के लिए सैन्य धाम की स्थापना भी की जा रही है। साथ ही 38 साल पहले ही अन्य लापता उत्तराखंड की ही सैनिकों के जवानों को खोजने की भी उम्मीद जगी है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि इसके लिए भी भारत सरकार से बात की जाएगी कि अन्य लापता जवानों का भी खोजबीन की जा सके।

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