रानीखेत किताब कौतिक का कवि सम्मेलन के साथ समापन, रचनाकारों ने श्रोताओं को घंटों तक अपनी कविताओं से बांधे रखा

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रानीखेत: यहां रानीखेत किताब कौतिक के समापन दिवस पर किताब कौतिक आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित ‘कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को घंटों तक मंत्र मुग्ध किए रखा। गोष्ठी की अध्यक्षता वयोवृद्ध साहित्यकार डॉ बिशन दत्त जोशी और मंच संचालन साहित्यकर्मी, रंगकर्मी विमल सती ने किया।

कवि सम्मेलन की शुरूआत डॉ बिशन दत्त जोशी द्वारा मां वागीश्वरी की वंदना’ ईजू आज सरस्वति का खुटमा..’ से की गई। तदोपरांत दिनेश तिवारी ने पहाड़ के हालात पर कुछ यूं कहा,’पहाड़ कहां हो रहा है शिफ्ट, पहाड़ को कौन कर सकता है शिफ्ट..।’प्रीति पंत ने‌मां को समर्पित अपनी पंक्तियों में कहा,’ईजा जो बच्चों की चिंता करने‌ वाली..।’ज्योति साह ने नारी को प्रकृति की अनुपम देन बताते हुए कहा,प्रकृति ने जीवन को सार्थक करने के लिए दो‌ धूरी बनाई,एक पुरुष दूसरी ममतामयी नारी कहलाई..।’मिथिलेश मिश्रा ने ‘अब इंसान बिक रहा..।. रचना के माध्यम से‌ लोगों को झकझोरने का प्रयास किया ।काव्यकार देवकीनंदन कांडपाल ने कुमाऊनी रचना ‘दि जगा थान में,छिट्टा भैट ध्यान में..सुनाई। अल्मोड़ा से आए साहित्यकार राजेंद्र सिंह बोरा उर्फ त्रिभुवन गिरी महाराज ने पहाड़ और नारी पर बिम्ब खींचते हुए शिखर -शिखर है दबे बर्फ़ से,ठिठुर रहे हैं जंगल सारे ..।रचना से प्रशंसा बटोरी।वहीं कृष्ण कुमार सती ने सामयिक रचना ‘जंगल की आग और हम कुमाऊनी ‘कविता प्रस्तुत की।
संचालन कर रहे साहित्यकर्मी विमल सती ने मां को संबोधित कविता में ,’ जब भी गिरा धरा पे, तू पीड़ा से भर गई..।’ जैसी पंक्तियों से वातावरण को भावसिक्त बना दिया वहीं जिया रवि नागर ने ‘मुझको शक्ति बना कर तुमने अपने साथ बैठाया ‘ रचना से भी श्रोताओं का दिल जीता।नवोदित रचनाकार प्रेरणा मेहरा ने ओज पूर्ण कविता ‘कभी हंसता कटा शीश हूं,कभी उठकर लड़ता कबंध हूं।’सुनाकर अपने रचनाकर्म की दस्तक दी। कवयित्री अंकिता पंत बिष्ट ने मां पर गहरा बिम्ब विधान रखते हुए ‘रास्ते में एक चलता मकान मिला, बेहद जर्जर सुनसान मिला.’ कविता पेश की।नवोदित कलम इमराना ने मां को याद करते हुए ‘बचूली काकी से प्यार’ रचना सुनाई । सारिका वर्मा ने मुक्तक ‘कवि कविता में लिखती हूं,कवि ग़ज़लें सुनाती हूं’पेश किया।युवा कवि कैलाश चंद्र ने बेरोजगारी पर क्षोभ प्रकट करते हुए कहा’गली-गली सुनी है मेरी, मैं इसका इकलौता राहगीर नहीं..।’गीता जोशी और भावना मेहरा रौतेला ने किताबों पर केंद्रित रचनाएं ‘सच्ची मित्र होती है पुस्तकें ‘और’किताबों की दुनिया ‘कविताएं पेश की।गीता पवार ने ‘आज का बचपन’और तनूजा जोशी ने’पहाड में जिंदगानी रचनाएं सुनाईं। डॉ विनीता खाती‌ ने‌’तेरे कुदरत की हालत क्या हो गई भगवान’कविता का वाचन किया। सोनाली रतूड़ी ने ‘मुझे गर्व है, मैं ‌नारी हूं’और सीमा भाकुनी ने नसीहत कविता प्रस्तुत की।
इसके अलावा हल्द्वानी से आईं कवयित्री पुष्पलता जोशी, अल्मोड़ा से आईं भावना जोशी,रूदपुर से डॉ प्रवीण ‘राही’, श्रीमती वीना जैन,नरेश डोबरियाल, डॉ बीएस कालाकोटी,दया ऐठानी,दिया आर्या, डॉ रिजवाना सिद्दीकी आमंत्रित रचनाकारों ने कविता पाठ किया।
करीब चार घंटे चले काव्य कलरव में श्रोता निरंतर प्रवाहित काव्य रस धारा में डूबते-उतराते खूब आनंदित रहे। wp:paragraph –>

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