राज्य में 5 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट हुआ जारी,सीएम ने राहत व बचाव कार्य की तैयारियां रखने को कहा

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उत्तराखंड में मानसून ने दस्तक दे दी है. इस बार मानसून का लगभग 10 दिन की देरी से राज्य में आगमन हुआ है. मानसून के पहुंचने के साथ ही राज्य में पहाड़ से लेकर मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश का सिलसिला जारी है. वहीं, तीन जिलों में आज बहुत भारी बारिश को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है. बागेश्वर,पिथौरागढ़ और नैनीताल के लिए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग ने कहा कि यहां पर कुछ स्थानों में बहुत भारी बारिश भी हो सकती है ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. 

आने वाले दिनों में भी ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने जताई गई है जिसमें पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, रुद्रप्रयाग और देहरादून जिले शामिल हैं. अभी 5 जुलाई तक प्रदेश में मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. इन जिलों में 5 जुलाई तक भारी तो कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश होने की संभावना भी मौसम विभाग ने जताई है. उत्तराखंड में मानसून की दस्तक खेती के लिहाज से काफी अच्छी मानी जा रही है. किसानों को बारिश का लंबे समय से इंतजार था. अब जहां बारिश से तपती गर्मी और उमस से राहत मिलेगी वहीं खेती के लिहाज से भी बारिश किसानों के लिए सुखद है. 

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मानसून की दस्तक के बाद उत्तराखंड में लैंडस्लाइड की घटनाएं भी सामने आती हैं. ऐसे में सभी विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है. सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन विभाग की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में चारधाम मार्ग पर लैंडस्लाइड वाले स्थानों को चिह्नित करने पर विशेष जोर दिया गया. लैंडस्लाइड की घटना पर तत्काल राहत कार्य शुरू करने के भी निर्देश दिए गए. 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में आपदा प्रबंधन की समीक्षा करते हुए कहा कि रेस्पोंस टाईम कम से कम होना चाहिए। आपदा की स्थिति में राहत व बचाव कार्य तत्काल शुरू हो जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपदा से संबंधित किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हरदम अलर्ट रहने के निर्देश दिये।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अगले तीन माह महत्वपूर्ण हैं। आपदा की चुनौतियों से निपटने के लिए जिलाधिकारी अधिकांश निर्णय अपने स्तर पर लें। जिन समस्याओं का समाधान जिलास्तर पर नहीं हो पा रहा है, उन्हें ही शासन तक भेजा जाय। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमें बढ़ायी जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन जनपदों में ड्रेनेज सिस्टम की समस्याएं हैं, ड्रेनेज प्लान शीघ्र भेजें। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि शासन स्तर पर जो बैठकें होती हैं, उससे पूर्व संबंधित विषयों पर जिलाधिकारी सभी विभागों की बैठक करें, ताकि शासन स्तर पर होने वाली बैठक में जिला स्तर पर आने वाली सभी परेशानियों को रखा जा सके।
मुख्यमंत्री वाहन दुर्घटना में मृतक परिजनों को दिये जाने वाले मुआवजे में वृद्धि का प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के साथ ही चारधाम यात्रा एवं कांवड़ यात्रा भी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा से जुड़े जनपदों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि चारधाम यात्रा सुव्यवस्थित चले। कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार, देहरादून, टिहरी एवं पौड़ी को पुलिस के साथ निरन्तर समन्वय बनाने के निर्देश दिये।

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बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के.सुधांशु, डीजीपी श्री अशोक कुमार, प्रमुख वन संरक्षक श्री विनोद कुमार सिंघल, सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, श्री शैलेश बगोली, डॉ. रंजीत सिन्हा, श्री नितेश झा, श्री रविनाथ रमन, डॉ. वी.बी.आर.सी. पुरूषोत्तम, श्री दिलीप जावलकर, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, वर्चुअल माध्यम से कमिश्नर गढ़वाल श्री सुशील कुमार, कमिश्नर कुमांऊ श्री दीपक रावत, डीआईजी कुमांऊ डॉ. नीलेश आनंद भरणे, सभी जिलाधिकारी, एस.एस.पी एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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