प्रेरक विभूतियों का शहर है रानीखेत

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-महेशजोशी

मध्य हिमालय की अद्भुत मनोरम श्रृंखलाओं का सौंदर्यपूर्ण दृश्य, मन को सुकून देने वाली हरियाली से घिरी ऊंची -नीची पहाड़ियों की आभा, अपने सैन्य अधिकारियों और सैनिकों के स्वास्थ्य तथा आरामगाह के लिए उत्तम, रानीखेत की स्थापना सन 1869 में अंग्रेजों द्वारा बहुद्देशीय  सोच के तहत की गई थी। अंग्रेज शासक रानीखेत को सैंटोरियम और छावनी के साथ-साथ भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी बनाना चाहते थे बहुदूरदर्शी विकास परक सोच के तहत अंग्रेजों द्वारा रानीखेत की प्राकृतिक आकर्षण शीलता के अनुरूप विकास की बुनियाद रखी गई थी ।वैश्विक फलक पर  रानीखेत को  अंग्रेजों की पर्यटन नीतियों के अनुरूप पहचान मिली थी ।वर्तमान में प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत देश-विदेश के सैलानियों के पसंदीदा  शहर रानीखेत को देश की द्वितीय श्रेणी की छावनी होने का दर्जा  प्राप्त है।

रानीखेत के विगत 152 वर्षों का अपना गौरवपूर्ण इतिहास रहा है जिसे संजोने में स्थानीय बाशिंदों की 5 पीढ़ियों के जीवन मिश्रित हुनर को चाहे वह किसी भी विधा से जुड़ा रहा, इस गौरव का श्रेय जाता है ।

रानीखेत के विगत 15 दशकों के इतिहास का अवलोकन करने से ज्ञात होता है कि अंग्रेजों द्वारा स्थापित छावनी परिषद जिसमें रानीखेत के गणमान्य प्रबुद्ध जनों को छावनी परिषद के सदस्य के तौर पर निर्वाचित कर छावनी के वाशिंदों ने रानीखेत के विकास के साथ-साथ  छावनी क्षेत्र में नागरिकों की सुख-सुविधाओं ,समस्याओं का निराकरण करने हेतु जो भी दायित्व सौंपा गया उसका बखूबी निर्वहन करने में  निर्वाचित सदस्यों का योगदान रहा है ।ऐसे प्रबुद्ध प्रेरक निर्वाचित छावनी परिषद सदस्यों में से अधिकतर आज हमारे मध्य नहीं हैं जिनमें स्व. मोहम्मद अली हुसैन,स्व. धनीलाल साह, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व एडवोकेट स्व. जय दत्त वैला ,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व छावनी परिषद के उपाध्यक्ष रहे मदन मोहन उपाध्याय ,स्व.राम सिंह बिष्ट, स्व. श्री प्रकाश कांडपाल, स्व.ख्यालीराम खुल्बे, स्व.लाला पोखर मल स्व.प्रकाश चंद आर्य, स्व.कुंदनलाल कनक ,स्व. घसीटाराम, स्व.मोहनलाल गोयल ,छावनी परिषद उपाध्यक्ष रहे स्व. शंकर दत्त उप्रेती,स्व.शांति उपाध्याय, स्व.गौरी लाल साह स्व. देवी  दत्त मैनाली,स्व. राम सिंह मेहरा तथा स्व. पूरन सिंह माहरा, स्व.प्रताप सिंह बिष्ट.स्व. देव सिंह भैसोडा़, स्व. नारायण सिंह भैसोड़ा का योगदान रानीखेत के विकास के लिए रहा है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रथम मनोनीत सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता स्व.जगदीश पंत ने भी छावनी क्षेत्र के नागरिकों की समस्याओं के निराकरण के लिए भरपूर प्रयास किए।

निर्वाचित छावनी परिषद सदस्यों के बीच से कुछ प्रबुद्ध सदस्यों द्वारा  ऐसे नितांत आवश्यक कार्यो का निष्पादन किया गया  जो रानीखेत वासियों के लिए स्मरणीय रहेंगे। स्व.पूरन  सिंह माहरा  द्वारा  छावनी परिषद के सिविल क्षेत्र  में पेयजल संकट के दृष्टिगत अन्य सदस्यों के सहयोग से गगास पेयजल योजना का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पास करवाने तथा पेयजल योजना का जल अधिभाग सिविल क्षेत्रों को उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया गया।इसी क्रम में प्रसिद्ध अधिवक्ता स्व. श्री प्रकाश कांडपाल नेे छावनी परिषद रानीखेत में वित्त चेयरमैन के पद में रहते छावनी परिषद सदस्य स्व.अली हुसैन,स्व. मोहम्मद कारी,तत्कालीन उपाध्यक्ष स्व. ख्याली राम खुल्बे ,स्व.जय दत्त वैला को साथ लेकर शहर में 1959 में हुए  भीषण अग्निकांड की घटना से तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन को अवगत कराया।  इन सम्मानित नागरिकों के दबाव में तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन को रानीखेत आना पड़ा। सम्मानित व्यक्तियों के सुझाव और सिफारिश के आधार पर तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने  रानीखेत अग्निकांड के पीडि़तों  के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और  तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलकर  पीडि़तों  को पुनः नव निर्माण कराने हेतु ब्याज मुक्त धनराशि अवमुक्त कराई।

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 रानीखेत छावनी का जिक्र  हेम चंद्र चौधरी  के नाम के बिना अधूरा सा लगता है। छावनी परिषद में वित्त चेयरमैन और फिर परिषद में उपाध्यक्ष पद पर रहे  श्री चौधरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से संपर्क बनाकर छावनी  सिविल एरिया क्षेत्र का मापदंड बढ़वाने  का कार्यकर छावनी नागरिकों को अनूठा उपहार दिया।हेम चंद्र चौधरी ने स्वयं  खिलाड़ी ना होते हुए रानीखेत में अखिल भारतीय हाॅकी टूर्नामेंट का आयोजन कर रानीखेत को खेल के क्षेत्र में गौरवान्वित किया। उस दौर में देश की नामी-गिरामी टीमें रानीखेत आकर अखिल भारतीय टूर्नामेंट की शोभा बढ़ाती थीं।  ऐसे ही तबके युवा  छावनी परिषद सदस्य व वित्त चेयरमैन भुवन चंद्र आर्य  उपाध्यक्ष दीप प्रकाश साह,सदस्य क्रमशः माधवानंद पाठक, वित्त चेयरमैन हिमांशु उपाध्याय शेखर चंद्र उप्रेती, दिनेश चंद्र अग्रवाल, उपाध्यक मुकेश फर्त्याल,उमेश पाठक , कैलाश चंद्र पांडे आदि ने छावनी परिषद बैठक में नामित सदस्यों के सहयोग से प्रस्ताव पास  करवा कर देवीढूंगा पेयजल योजना की सौगात तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से संपर्क कर रानीखेत को दिलवाने में अहम भूमिका का निर्वहन किया।इसी क्रम में  परिषद के ऊर्जावान उपाध्यक्ष मोहन नेगी, वित्त चेयर मैन संजय पंत,सदस्य  सुकृत साह, विनोद प्रसाद, बिंदु रौतेला, कमला खेतवाल, अंजू पांडे ,अर्चना पाठक ने छावनी परिषद बोर्ड बैठक में  नामित सदस्यों से मिलकर प्रस्ताव पारित करा भारत सरकार को प्रेषित कर भूमि प्रशासन नियमावली 1937 को बदलवाने के लिए दबाव बनाया । चहुंदिश दबाव के बाद  भारत सरकार को नई भूमि प्रशासन योजना का मसौदा भेजकर छावनी वासियों से सुझाव व आपत्तियां  मांगने के लिए बाध्य होना पड़ा। यह छावनी परिषद के सिविल सदस्यों का दबाव ही है कि सन 1937 के  भूमि प्रशासन नियमावली  में संशोधन को लेकर सरकार स्तर पर कार्रवाई तेज हुई है।

राजनीतिक तौर पर देखें तो प्रदेश व केंद्र व शहर में  स्थापित विभिन्न दलों  में रहकर अपने कार्यों से रानीखेत को गौरवान्वित करने वालों में स्व.भगवत सिंह महरा, स्व. भीम सिंह फर्त्याल, स्व. गोविंद सिंह माहरा , स्व. पूरन सिंह माहरा, स्व.बची सिंह रावत जैसे राजनीतिज्ञों का नाम उनके द्वारा किए गए कार्यों से आज भी अमर है। रानीखेत के  अजय भट्ट वर्तमान भारत सरकार में केंद्रीय रक्षा मंत्री व पर्यटन राज्यमंत्री के पद पर सुशोभित हैं वहीं करन माहरा उपनेता सदन रहते  विधानसभा में यहां की  समस्याओं का निराकरण कराने हेतु प्रयासशील हैं।

रानीखेत के विद्यालयों में शिक्षार्जन कर छात्र-छात्राएं समय -समय पर देश के प्रतिष्ठित सरकारी ,गैर सरकारी व विदेशी प्रतिष्ठानों में उच्च पदों पर आसीन होकर रानीखेत को सदैव गौरवान्वित करते रहे हैं।एक दौर में छावनी परिषद के उपाध्यक्ष रहे  स्व.ख्याली राम खुल्बे के सुपुत्र भाष्कर खुल्बे बंगाल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं जो वर्तमान में पीएमओ में कार्यरत हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख सलाहकार हैं।इसी तरह शहर के नामचीन अधिवक्ता रहे स्व. मथुरा दत्त भंडारी के सुपुत्र डाॅ.मोहन चंद्र भंडारी ने  भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट जनरल पद पर रहकर रानीखेत को गौरवान्वित किया है।इसी तरह विद्वान अधिवक्ता स्व.श्रीधर जोशी के सुपुत्र क्रमशः बृजेश और सोमेश जोशी ने उच्च पदों को सुशोभित किया।इस क्रम  में नेशनल इंटर काॅलेज में वरिष्ठ  अध्यापक रहे स्व.मनोहर लाल साह के पुत्र दीप साह उत्तराखंड शासन में उच्च पद पर आसीन हैं। शिक्षक स्व.जगन्नाथ साह के पुत्र क्रमशः प्रमोद साह,मंजुल साह,राकेश साह और सुनील साह भी श्रेष्ठ पदों पर रहते रानीखेत की सांस्कृतिक ज्योति को अपने अंशदान

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से प्रखरता प्रदान करते रहे हैं।  

ब्रिटिश शासनकाल में रानीखेत छावनी शहर में भी मिशनरी शिक्षा का प्रभाव था जिसे देखते हुए विद्वान अधिवक्ता स्व. श्रीधर  जोशी,स्व. मथुरादत्त भंडारी,स्व.बिहारी लाल साह(खजांची साहब),स्व.उमाकांत पंत(सेठ जी) स्व.देवी दत्त पंत,श्री अमर सिंह एरडा़,स्व.डाॅ. डी एस बंगारी, ने अथक प्रयासों और निजी व्यय से निर्धन बच्चों को शिक्षा मुहैेया कराने के लिए नेशनल इंटर काॅलेज की स्थापना की जहां दूरस्थ गांवों से निर्धन छात्र शिक्षार्जन के लिए आते रहे।समाज की  आर्थिक सहायता के लिए हमेशा तत्पर डाॅ.बंगारी  लम्बे समय तक इस विद्यालय के प्रबंधक रहे।वर्तमान में उनके सुपुत्र डाॅ.कौशलेंद्र बंगारी  विद्यालय प्रबंधन समिति के  सदस्य हैं और विद्यालय को संवारने में अपना योगदान दे रहे हैं। 

 नेशनल इंटर काॅलेज का प्रथम अध्यापक बनने का श्रेय स्व.मोहन चंद्र जोशी उर्फ मोहन मासाब को जाता है जो कि नाट्य और नृत्य विधा में भी पारंगत थे।रामलीला में उनको उर्वशी की भूमिका में देखने दूरदराज से दर्शक आते थे।   

नेशनल इंटर कॉलेज में शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापन कार्य करते हुए प्रथम प्रधानाचार्य स्व.हरिराम पांडेय, पूर्व प्रधानाचार्य क्रमशः  स्व.नंदन सिह  फर्त्याल,  स्व.गिरीश चंद्र भट्ट , सुरेश जोशी ,श्री हरि सिंह कडा़कोटी ,प्रधानाचार्य श्री शेर सिंह नेगी, डाॅ विपिन चंद्र शाह ,साहित्यकार  स्व.सतीश चंद्र जोशी ‘व्योमेश’,स्व. जगन्नाथ साह, स्व.राम दत्त तिवारी, स्व. देवी दत्त तिवारी, स्व.मनोहर लाल साह जो कि श्रेष्ठ क्रिकेट खिलाडि़यों में शुमार थे। सेवानिवृत्त  अध्यापक मोहन चौधरी जो स्वयं में रंगकर्मी भी थे। ऐसे ही श्री ओम प्रकाश साह ने भी शिक्षा के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में विद्यालय को अग्रणी रखा।उनके पिताजी स्व. शंकर लाल साह को भी रामलीला मंचन में कलाकारों का सजीव मेकअप  करने में महारत हासिल था। चूर्णामणि हरबोला,खीमराज नेगी आदि अपने विषय के ज्ञाता शिक्षकों के श्रेष्ठ मार्गदर्शन में तत्कालीन छात्र -छात्राओं ने जीवन में श्रेष्ठ स्थान हासिल किया।  वर्तमान में नेशनल इंटर काॅलेज प्रधानाचार्य श्री सुनील जोशी के कुशल निर्देशन में संचालित हो रहा है।

वहीं  विद्यालय की  शिक्षिका श्रीमती विमला रावत के संचालन में विद्यालय पुनः सांस्कृतिक ऊंचाइयों को पकड़ रहा है।

  नेशनल इंटर कॉलेज के छात्र -छात्राओं ने शिक्षा प्राप्त कर चिकित्सक, इंजीनियर ,आर्किटेक्ट ,चार्टर्ड अकाउंटेंट ,एमबीए व कानून और पत्रकारिता इत्यादि डिग्री प्राप्त कर सदैव उच्च पद पर आसीन होकर शहर रानीखेत में स्थित नेशनल काॅलेज व शहर का गौरव बढा़या है।इसी क्रम में  स्व. जगदीश चंद्र जोशी जोकि नेशनल कालेज की प्रबंध समिति के सदस्य रहे और टाइप  इंस्टिट्यूट के साबिर हुसैन द्वारा शहर के निर्धन छात्र -छात्राओं को निशुल्क टंकण  की सुविधा प्रदान की जाती रही  जिसकारण निर्धन छात्र -छात्राओं ने भी देश-विदेश में जाकर उच्च पद सुशोभित कर रानीखेत का गौरव बढा़या। 

रानीखेत के प्रख्यात गणित शिक्षक  स्व.ख्यालीराम सती के पौत्र और व्यवसायी रहे श्री मदन मोहन सती के पुत्र विमल सती जो कि वर्तमान में नेशनल इंटर काॅलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं इसी विद्यालय के मेधावी  छात्र रहे हैं।वरिष्ठ पत्रकार,संपादक,कवि,साहित्य व संस्कृतिकर्मी विमल सती के बतौर अध्यक्ष मिल रहे मार्गदर्शन को विद्यालय परिवार अपना सौभाग्य मानकर चल रहा है।प्रबंध समिति में प्रख्यात शिक्षक स्व.पंडित इंद्र लाल वर्मा के सुपुत्र श्री अनिल वर्मा(से.नि.वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी) और प्रसिद्ध उद्यानविद स्व. उमेश चंद्र शाह के सुपुत्र श्री भुवन चंद्र शाह (से.नि.सहायक प्रबंधक एसबीआई) और श्री मुकेश शाह (से.नि.इंजीनियर रक्षा उत्पादन) के सहयोग से विद्यालय गौरवान्वित है।श्री मुकेश शाह हाॅकी के श्रेष्ठ खिलाडी़ रहे हैं और अखिल भारतीय हाॅकी प्रतियोगिता में अपना अहम योगदान दे चुके हैं।

सांस्कृतिक क्षेत्र में रानीखेत के कलाकारों व रंगकर्मियों ने राष्ट्रीय व वैश्विक फलक पर अपनी धमक कायम की है। स्व.प्रेम बल्लभ बुदलाकोटी,स्व. उदय नाथ साह,  स्व. लाला पोखर मल ,किशोरी मास्टर साहब, स्व.देवी दत्त मैनाली स्व. जगन्नाथ साह,

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 स्व.बिशन महेश्वरी ,स्व. शेखर पांडे ,स्व.नवीन बुधलाकोटी ,स्व . जेपी साह,स्व.गणेश जोशी,स्व.पूरन माहरा  श्री चंद्रमोहन पपनै,जगदीश वर्मा, कैलाश पांडे,हेम चंद्र चौधरी चंद्र प्रकाश बिष्ट ,किरन लाल साह आदि रानीखेत की ऐतिहासिक रामलीला के मझे हुए कलाकार रहे हैं।इनकी संवाद अदायगी और अभिनय कला के लोग आज भी कायल हैं।इसके अलावा नाट्य व संगीत के क्षेत्र में भी रानीखेत ने बेहतर कलाकार दिए हैं। हाल निवासी दिल्ली चंद्र मोहन पपनै वर्तमान में देश की प्रसिद्ध संस्था पर्वतीय कला केंद्र के अध्यक्ष है और इस संस्था से सालों से जुडे़ हैं। वहीं संस्कृति एवं नाट्य कर्मी विमल सती एक दशक तक प्रगतिशील कला मंच जैसी नाट्य संस्था चलाकर अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते रहे हैं,काॅलेज के दिनों में लगातार तीन साल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब प्राप्त करते आए विमल सती पिछले तीन दशक से रानीखेत में सांस्कृतिक आयोजनों की अलख जगाए हुए हैंऔर नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराकर रानीखेत में सांस्कृतिक आयोजनों /उत्सवों की पहचान बने हुए हैं।वहीं पेशे से शिक्षक संदीप गोरखा ने नई पीढी़ के संगीत साधकों में अपनी अलग पहचान बनायी है।संदीप यूं तो संगीत की सभी विधाओं में पकड़ रखते हैं लेकिन होली गायन के लिए उन्हें विशेष तौर से जाना जाता हैऔर अन्य शहरों में भी सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाता रहा है।

रानीखेत में ऐतिहासिकश्री कृष्ण  जन्माष्टमी उत्सव की चर्चा स्व.लक्ष्मी नारायण शर्मा के बिना अधूरी सी लगती है।स्व.शर्मा ने मेरठ से आकर रानीखेत में बसने के साथ ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री कृष्ण -राधा की सजीव झांकियों का चलन शुरू किया।इन झांकियों को देखने दूरदराज से लोग आते थे।आज  जन्माष्टष्मी पर इसी परम्परा को आगे बढा़ने के लिए उनके पौत्र अजय,विजय,संजय शर्मा  बच्चों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करते हैं। पूर्व में धार्मिक यात्रा पर आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए यहां शिव मंदिर प्रांगण में धर्मशाला की स्थापना परोपकारी/धर्म प्रेमी व्यवसायी स्व.रूपकिशोर(गप्पू लाला जी)द्वारा विषम परिस्थितियों में करायी गई थी आज भी उनके पुत्र रमेश खंडेलवाल ,पौत्र दीपक खंडेलवाल( ऊन व्यवसायी) शहर के धार्मिक,सांस्कृतिक आयोजनों में अपना योगदान देते हैं।

 रानीखेत में 1962 के  युद्ध हेतु धनराशि उपलब्ध कराने के लिए  “पृथ्वीराज की  दो आंखें” नाटक का मंचन किया गया  जिसमें श्री प्रकाश चंद साह (जीवन विला) ने अहम भूमिका निभायी।नाट्य मंचन से  प्राप्त धनराशि को भारत सरकार  भेजा गया। देश के विभिन्न रंगमंचों पर “पृथ्वीराज की दो आंखें”नाटक का मंचन स्व. जगन्नाथ साह व स्व.चंदन सिंह मेहरा के निर्देशन में कई बार  मंचित किया गया ।उक्त नाटक में श्री चंद्र मोहन पपनै, जगदीश वर्मा और किरन लाल साह द्वारा निभाया सजीव अभिनय द्वारा  रानीखेत के कला प्रेमियों के मन मस्तिष्क आज भी ताजा है।उक्त नाटक की ख्याति को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा स्व.जगन्नाथ साह व स्व.चंदन सिंह मेहरा को सम्मानित किया गया था ।आज जब भी   नेशनल इंटर कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं स्व.जगन्नाथ साह और स्व. चंदन सिंह मेहरा को सदैव याद किया जाता है ।

सर्वविदित  है कि किसी भी शहर में रहने वाले नागरिक ही  शहर को अच्छा या बुरा बना सकते हैं। जीवंत शहर में एक गूढ़ विद्वत व जागरूक समाज की नितांत जरूरत होती है रानीखेत भी मौजूदा वक्त में इसकी आवश्यकता महसूस कर रहा है।

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