उत्तराखंड की विधानसभा सीटों पर बढ़ते मतदाता तब और अब, क्यों और कैसे?

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सी एम पपनैं

उत्तराखंड में चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। सभी दलों व प्रत्याशियों द्वारा धुआंधार प्रचार किया गया है। पांचवें उत्तराखंड विधान सभा चुनाव 2022 के लिए, मतदाताओं की अंतिम सूची कुछ दिन पूर्व, जारी कर दी गई थी। 14 फरवरी को राज्य के मतदाताओ द्वारा, कुल 632 चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों, जिनमे 152 निर्दलीयो की भी तादात है, 70 विधानसभा सदस्यों के चुनाव के लिए, मतदान की तैयारी चुनाव आयोग द्वारा पूर्ण कर ली गई है। राज्य में कुल मतदेय स्थल 11,647 तथा कुल मतदान केन्द्रो की संख्या 8,624 है। 156 मॉडल बूथ तथा 101 सखी पोलिंग बूथ भी बनाऐ गए हैं। निगरानी व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए, चुनाव आयोग द्वारा, बूथों की वेब कास्टिंग करने का निर्णय लिया गया है। राज्य प्रभारी सचिव द्वारा, मतदान दिवस के दिन, सभी कार्यरत नौकरी-पेशा लोगों के लिए, सवैतनिक अवकाश, स्वीकृत किया गया है।

निर्वाचन आयोग द्वारा, 81,72,173 वोटरों की सूची को, अंतिम रूप से प्रकाशित कर दिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के तीसरे विधानसभा चुनाव 2012 में कुल मतदाताओ की संख्या जहा 63,77,330 थी, वह अब पांचवी विधानसभा चुनाव 2022 में, वोटरों की संख्या तीस प्रतिशत, 18,89,314 बढ़ गई है। 2002 से 2012 तक यह संख्या बीस प्रतिशत बढी थी।

राज्य की धरमपुर विधानसभा क्षेत्र मे, 72 प्रतिशत वोटरों के बढ़ने का आंकड़ा है। रुद्रपुर 61, डोयवाला 56, सहसपुर 55, कालाढूगी 53, काशीपुर 50, रायपुर 48, किच्छा 47, रानीपुर 45, ऋषिकेश 41, लोहाघाट, डीडीहाट तथा यमकेश्वर मे 16 प्रतिशत, जागेश्वर 15, लैंसडाउन 14, द्वाराहाट व पौडी मे 12 प्रतिशत, चोबट्टाखाल व रानीखेत मे 9 प्रतिशत तथा सल्ट विधानसभा क्षेत्र मे 8 प्रतिशत वोटर बढ़ने के आंकडे दृष्टिगत हुए हैं।

उक्त आंकड़ों का अवलोकन कर स्पष्ट ज्ञात होता है, जिन सीटों पर मतदाता 2012 से 2022 तक, अप्रत्याशित रूप से बढे, वे सब, मैदानी सीटे हैं। जिनमे 41 से 72 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है।राज्य के चार मैदानी जिलों की, 36 सीटों पर, विगत दस साल के दौरान 37 फीसद मतदाता बढे हैं। उधमसिंह नगर जिले में 3,92,506 कुल 43 प्रतिशत, देहरादून जिले मे 4,33,542 कुल 41 प्रतिशत, नैनीताल जिले मे 1,91,147 कुल 32 प्रतिशत तथा हरिद्वार जिले मे, 3,34,844 कुल 31 प्रतिशत। सबसे ज्यादा, 43 प्रतिशत वोटर उधमसिंह नगर जिले मे बढने के आंकडे हैं।

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राज्य के पर्वतीय भू-भाग वाले जिले उत्तरकाशी मे वोटरों के बढ़ने का यह आंकड़ा, 48,000 कुल 25 प्रतिशत, टिहरी 1,01,439 कुल 23 प्रतिशत, पिथौरागढ 73,926 कुल 23 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग 37,392 कुल 23 प्रतिशत, चंपावत 36,501 कुल 21 प्रतिशत, बागेश्वर 37,772 कुल 20 प्रतिशत, चमोली 49,479 कुल 19 प्रतिशत, पौडी 89,486 कुल 18 प्रतिशत तथा अल्मोडा जिले मे 63,280 कुल 13 प्रतिशत वोटर बढ़ने का आंकड़ा, दृष्टिगत हुआ है।

आंकड़ो के मुताबिक, मैदानी भाग के कुल वोटर 36 विधानसभा सीटों पर, 61 प्रतिशत तथा पर्वतीय भू-भाग की 34 विधानसभा सीटों पर, मात्र 39 प्रतिशत वोटरो का आंकड़ा है। औसतन राज्य की हर सीट पर 1,18,095 मतदाताओ का आंकड़ा है। राज्य की 36 मैदानी सीटों पर, प्रति विधानसभा सीट पर, वोटरों का औसत आंकड़ा 1,39,191 तथा पर्वतीय भू-भाग की 34 विधानसभा सीटों पर यह आंकड़ा औसतन 95,758 वोटरो का है। राज्य मे नया परिसीमन होने पर, पर्वतीय अंचल की विधानसभा सीटे कम व मैदानी सीटे और बढ़ जाऐंगी।

पलायन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ राज्य के अंदर बडी संख्या में पलायन हो रहा है, जिले से जिले में पलायन करने वाले की संख्या का आंकड़ा ज्यादा है, जो राज्य के पर्वतीय अंचल से राज्य के ही मैदानी भाग मे हुआ है।

प्रकाशित सूची के मुताबिक राज्य में, पुरुष मतदाताओ की संख्या लगभग 42.39 लाख व महिला मतदाताओ की संख्या 39.33 लाख शामिल है। रुद्रप्रयाग उत्तराखंड का एक मात्र ऐसा जिला है, जहा पर मतदाता लिंगानुपात में, एक हजार पुरुषो के सापेक्ष 1021 महिलाओ का आंकड़ा है।

कोरोना विषाणु संक्रमण की दहशत के चलते, विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा, कई बदलाव भी किए गए हैं। ईवीएम पर प्रत्याशी के चुनाव चिन्ह के साथ-साथ, फोटो रहेगी। कर्मचारी पीपीई किट पहनेगें। वोटर को मास्क पहना अनिवार्य होगा। मतदान से पहले मतदाता को ग्लब्ज दिए जायैंगे। दिव्यांग मतदाता के लिए, एक वाॅलिंटियर तैनात रहेगा। मतदान केन्द्रो पर मदद के लिए, एनसीसी, एनएसएस, महिला मंगल दल, सिविल डिफेंस से वाॅलिंटियर भी तैनात किए जाने की सूचना है।मतदाता पर्ची का साइज इसबार ए-फोर साइज पेपर का आधा रहेगा। जिस पर मतदाता का पूरा विवरण, मतदान केन्द्र, बूथ डिटेल, चुनाव आयोग का हैल्प लाइन नम्बर, मतदान की तिथि, वोटिंग का समय इत्यादि दर्ज होगा।

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कुछ दिन पूर्व ही, राज्य में भारी हिमपात व वर्षा हुई है। जिससे लोगों की मुश्किले बढी हैं। राज्य के कई जिलों मे, ढाई हजार मीटर की उचाई वाले जिलों में भारी बर्फवारी की व मैदानी जिलों मे बारिश की संभावना जताई जा रही है। राज्य मे दिन-प्रतिदिन बदलते मौसम के बीच, मौसम विभाग द्वारा पूर्वानुमान लगाया गया है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा, केन्द्रीय चुनाव आयोग से मौसम खराब होने की स्थिति में, दो हालिकैप्टर व एक एअर एम्बुलैंस की मांग की गई है। चुनाव आयोग मौसम के मिजाज को परख, ऐहतिहातन अपनी तैयारी पूरी किए हुए है।

उत्तराखंड के पर्वतीय भू-भाग में, कुल 766 मतदान केन्द्र बर्फबारी वाले इलाको मे हैं। नैनीताल जिले मे 128 मतदान केन्द्र, उत्तरकाशी मे 113, चमोली मे 103 मतदान केन्द्र ऐसे इलाको मे हैं, जहा बर्फबारी के कारण बडी चुनोतिया हैं। कई इलाको मे बर्फ अभी पिघली नहीं है। बर्फबारी वाले इन दुर्गम इलाको के लिए, तीन दिन पहले ही पोलिंग दल प्रस्थान कर गए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग की सूचना के मुताबिक, बद्रीनाथ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत, डुमक मतदान केन्द्र, गोपेश्वर से सड़क मार्ग 55 किमी ऐंव पैदल 20 किमी। धारचुला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत, कनार मे बना मतदान केन्द्र, पिथौरागढ सड़क मार्ग से 80 किमी, ऐंव पैदल 18 किमी।पुरोला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत, कलाप मे बना मतदान केन्द्र, उत्तरकाशी से सड़क मार्ग 80 किमी, ऐंव पैदल 13 किमी की चढाई चढ़ कर, बनाया गया मतदान केन्द्र है। राज्य के सबसे दूरस्थ मतदेय स्थल, चकराता विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का डाँगूठा, जिला मुख्यालय से, 250 किमी की दूरी पर है। ओसला मतदान केन्द्र, जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से, 200 किमी दूर है। 14 किमी का पैदल मार्ग भी तय करना पड़ता है तथा मौन्डा मतदान केन्द्र जिला मुख्यालय से 256 किमी की दूरी पर है।

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भारत निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशानुसार, मतदाताओ के द्वारा, राशन कार्ड को छोड़, अन्य मान्य पहचान पत्र से, मताधिकार का प्रयोग किया जा सकता है। अगर मतदाता का नाम मतदाता सूची में है, लेकिन पहचान पत्र नहीं है। ऐसे मे मतदाता, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पास बुक, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसैंस, फोटो युक्त विभागीय पहचान पत्र, बीएलओ द्वारा दी गई मतदाता पर्ची जैसे, पहचान पत्र दिखाकर, मतदान कर सकते हैं।

चुनाव में करोना विषाणु संक्रमित भी मताधिकार का प्रयोग कर सकैगे, चुनाव आयोग द्वारा व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बूथ पर व्यवस्था बनाने के निर्देश, चुनाव आयोग के द्वारा जारी किए गए हैं। करोना विषाणु संक्रमित को, पहले ही चिंहित कर लेने की व्यवस्था, चुनाव आयोग द्वारा कर ली गई है। चुनाव आयोग द्वारा, स्वास्थ विभाग कोविड सर्विलांस टीम की मदद ली जा रही है। चुनाव संचालन के लिए, स्वास्थ विभाग से करोना मरीजो के बारे मे, समन्वय बनाया गया है। स्वास्थ विभाग से सक्रिय मरीजो के नम्बर लिए जा रहे हैं। मरीजो से बूथ की डिटेल ली जा रही है। उन्हे वोटिंग का समय बताया जा रहा है। प्रोटोकाल की अपील की जा रही है। पीड़ितों के लिए प्रोटोकाल का पालन करते हुए, मत डलवाने की व्यवस्था चुनाव आयोग द्वारा, राज्य के हर बूथ पर की गई है। पीपीई किट पहनवा कर, करोना पीड़ितों से मतदान कराए जाने की व्यवस्था की गई है। मतदान कर्मचारी को भी पीपीई किट पहनने के दिशानिर्देश जारी हुए हैं। आंकड़ो के मुताबिक राज्य में करीब नौ हजार केस करोना विषाणु संक्रमितो के हैं।
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