बिनसर और अस्कोट अभयारण्य ईको सेंसटिव जोन घोषित करने के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी

ख़बर शेयर करें -

उत्तराखंड में 76.019 वर्ग किलोमीटर में फैले बिनसर और 600वर्ग किलोमीटर में फैले अस्कोट अभयारण्य के चारों ओर ईको सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ कमेटी की बैठक में ये प्रस्ताव अनुमोदित किए गए।
राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि दोनों अभयारण्यों के ईको सेंसिटिव जोन से सभी गांव बाहर कर दिए गए हैं। सेंसिटिव जोन की सीमा 20 मीटर से सात किलोमीटर तक की परिधि में रखी गई है। अब जल्द ही केंद्र सरकार इन सेंसिटिव जोन की अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।
कुमाऊं मंडल में अल्मोड़ा व बागेश्वर जिलों की सीमा में स्थित बिनसर अभयारण्य और पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट अभयारण्य के ईको सेंसिटिव जोन का संशोधित प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। दोनों ही सेंसिटिव जोन से 147 गांवों को बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया। केंद्र ने इन प्रस्तावों को अनुमोदित किया है। 76.019 वर्ग किलोमीटर में फैले बिनसर अभयारण्य के चारों तरफ तीन किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। इसी तरह 600 वर्ग किमी में फैले अस्कोट अभयारण्य के चारों तरफ 454 वर्ग किमी के क्षेत्र को सेंसिटिव जोन के दायरे में लाया गया है। दोनों ही अभयारण्यों के ईको सेंसिटिव जोन से 500 मीटर दूर तय नियमों के तहत विनियमित आधार पर खनन, पत्थर चुगान की अनुमति स्थानीय निवासियों को मिलेगी।इसके साथ ही सेंसिटिव जोन के नजदीक विनियमित गतिविधियों में वर्किंग प्लान के अनुसार सूखे, गिरे व उखड़े पेड़ों का कटान, होटल व रिसार्ट का निर्माण, सक्षम प्राधिकरणों से भू उपयोग परिवर्तन, जलस्रोतों का संरक्षण, बिजली के टावरों की स्थापना, पहले से निर्मित सड़कों की मरम्मत व निर्माण, हेलीकाप्टर, ड्रोन व गर्म हवा के गुब्बारों की उड़ान आदि को शामिल किया गया है। इसके अलावा ईको सेंसिटिव जोन में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की स्थापना, लकड़ी का व्यवसायिक उपयोग जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित होंगी।

Ad
Ad

Leave a Reply

Your email address will not be published.