त्वरित टिप्पणी -मोदी एक बार फिर गेम मेकर ,गेम चेंजर गेम विनर साबित हुए हैं और उनके सामने विपक्ष की योजनाएँ भुरभुरी मिट्टी की तरह ज़मींदोज़ हो गयी हैं

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दिनेश तिवारी .( त्वरित टिप्पणी)
यह हिंदू अस्मिता के सवाल को पुनः बहुत कामयाब तरीक़े से उभार लाने की योजना की जीत है . यह अपनी आर्थिक विफलताओं के सामने हिंदू पहचान के प्रश्न को युद्ध के मैदान में उतारने की भाजपा की चित परिचित चुनावी रणनीति की जीत है . ये चुनाव नतीजे हरगिज़ चौंकाने वाले नहीं हैं . और न ही अप्रत्याशित कहे जा सकते हैं . यह हिंदी बेल्ट में भाजपा की अजेय बढ़त को प्रदर्शित करने वाले प्रतीक चिन्हों का पुनः विशाल आकार में प्रकट होना मात्र है . इस लिहाज़ से चुनाव नतीजे भाजपा की चुनाव योजना का स्वाभाविक परिणाम हैं . मोदी एक बार फिर गेम मेकर ,गेम चेंजर गेम विनर साबित हुए हैं और उनके सामने विपक्ष की योजनाएँ भुरभुरी मिट्टी की तरह ज़मींदोज़ हो गयी हैं . भारतीय राजनीति के क्षितिज में आख़िर मोदी के इस ब्यापक आगमन के कारण क्या हैं और हिंदी बेल्ट में कांग्रेस के पराभव की असली वजह क्या है , यह बात इस दौर में समझनी बहुत ज़रूरी है .
हिंदी बेल्ट के एक महत्वपूर्ण राज्य छतीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी का मीडिया के बड़े हिस्से में बड़ा शोर था और यह लग भी रहा था कि मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बना और बचा ले जाएगी . पर यह हो नहीं सका . इसके विपरीत भाजपा ने हारते हुए भी बाज़ी पलट दी और फ़ाइनल राउंड में कांग्रेस को गेम से आउट कर दिया . मध्यप्रदेश संघ परिवार की सबसे पुरानी और सबसे सफल प्रयोगभूमि रही है . यहाँ हर दस में से सात परिवार संघ की राजनीति से या तो जुड़े हैं या प्रभावित हैं . राममंदिर आंदोलन के प्रभाव वाले राज्यों में मध्य प्रदेश , राजस्थान , उत्तर प्रदेश सबसे सघन और मुखर राज्य रहे हैं और संघ परिवार किसी न किसी रूप में भावनात्मक रूप से इन हिंदी भाषी राज्यों को अपने से जोड़ने में कामयाब रहा है .हिंदी प्रदेशों में भाजपा हमेशा सनातन हिंदू धर्म की स्विंग करने वाली पिच तैयार करती है और मुस्लिम शासकों से हिंदू राजाओं और जनता पर किए गए अत्याचार को अपने आक्रामक प्रचार से रिकॉल करती है . वह अतीत में ले जाकर डराती है और अपने वर्तमान का व्याकरण तैयार करती है . मध्यप्रदेश , राजस्थान और छतीसगढ़ में उसने यही किया . पाकिस्तान और आतंकवाद का डर , लवजेहाद , हाल ही में राजस्थान में कुछ हिंसक घटनाओं का ज़िक्र उसके प्रचार के प्रमुख बिंदु थे .कह सकते हैं कि इज़रायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध का भी इस्तेमाल संघ परिवार ने बहुत चतुराई से भाजपा के पक्ष मैं किया . हिंदू वोटरों को यह समझाया गया कि कांग्रेस हमास के ख़िलाफ़ कुछ नहीं बोलती और अगर कांग्रेस जीतती है तो भारत में भी इज़रायल जैसे हालात हो सकते हैं . यह निर्विवाद है कि संघ परिवार कांग्रेस को सनातन परम्पराओं की धुर विरोधी और इस मायने में हिंदू हितों के ख़िलाफ़ खड़ी पार्टी बताता रहा है . इन राज्यों में भाजपा ने इतिहास की क़ब्रों से इतने किरदार भूत की तरह कांग्रेस के रास्ते में खड़े कर दिए कि कांग्रेस अपना स्वाभाविक गेम भूल गयी .
अगर राजस्थान , छतीस गढ़ में सरकार विरोधी लहर को कारण मान भी लें तो मध्यप्रदेश में भाजपा के इस विस्फोट का कारण क्या है ? यहाँ यह जानना दिलचस्प है कि शुरुआती दौर में भारी जीत की ओर बढ़ रही कांग्रेस को आख़िर में रिंग से बाहर क्यों बैठना पड़ा .?( जारी है )

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एडवोकेट दिनेश तिवारी लेखक एवं सोशल एक्टिविस्ट हैं