प्रख्यात लेखिका ममता कालिया द्वारा ‘भारतीय महिला शक्ति सम्मान-2022’ से नवाजी गई उत्तराखण्ड की सु-विख्यात लोकगायिका आशा नेगी

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सी एम पपनैं

नई दिल्ली। सावित्री बाई फूले फाउंडेशन पूणे द्वारा, सामाजिक-सांस्कृतिक व्यक्तित्व राहुल तायल की याद मे 22 सितंबर, गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली मे, लेखक व कवि अतुल प्रभाकर की अध्यक्षता मे, देश के अनेक राज्यो से विभिन्न विधाओ मे ख्याति प्राप्त तीस महिलाओ को ‘भारतीय महिला शक्ति सम्मान-2022’ से, देश की विभिन्न भाषाओं की गौरव व ख्याति प्राप्त लेखिका ममता कालिया के कर कमलो नवाजा गया। उत्तराखण्ड की सु-विख्यात लोकगायिका आशा नेगी को उक्त राष्ट्रीय सम्मान, लोकगायन के क्षेत्र मे प्रदान किया गया।

समारोह का श्रीगणेश मुख्य अतिथि, प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया व अन्य विशिष्ट अतिथियो पद्दमश्री डाॅ बी के एस संजय (विश्वविख्यात आर्थोपेडिक सर्जन), पंडित विजय शंकर मिश्र (लेखक व संगीत कला मर्मज्ञ) डाॅ सुधीर (गांधीवादी चिंतक), सविता चड्डा (साहित्यकार), अब्दुल अजीज सिद्दीकी (फोटो पत्रकार), डाॅ अनामिका (विख्यात कवियित्री व साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता), शशी मुदीराज (हिंदी साहित्य मर्मज्ञ) व प्रसून लतांत (गांधीवादी चिंतक व वरिष्ठ पत्रकार) के कर कमलो, दीप प्रज्ज्वलित कर व उत्तराखंड की लोकगायिका आशा नेगी द्वारा प्रस्तुत कुमाउनी श्रीगणेश वंदना, ‘दैणा होया खोली का गणेशा…।’ से शुभारंभ किया गया।

सवित्री बाई फूले फाउंडेशन सचिव हेमलता म्हस्के तथा प्रसून लतांत द्वारा उपस्थित सभी अतिथियो, सम्मानित होने जा रही अग्रणी महिलाओ व सभागार में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों का अभिनंदन आभार व्यक्त किया गया। राहुल तायल को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया तथा फाउंडेशन के उद्देश्य व विभिन्न सरोकारों हेतु, किए जा रहे कार्यो पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया। फाउंडेशन पदाधिकारियों द्वारा मुख्य व विशिष्ट अतिथियों को शाल ओढ़ा, पुष्पगुच्छ व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि, प्रख्यात साहित्यकार ममता कालिया व अन्य विशिष्ट अतिथियो के कर कमलो, आशा नेगी (लोकगायन) उत्तराखंड, अन्नपूर्णा तिवारी (समाज सेवा) छत्तीसगढ़, आकांक्षा पारे (साहित्य) दिल्ली, बरखा लकडा (आदिवासी कल्याण) झारखंड, वंदना झा (समाज सेवा) बिहार, वीना कुमारी (महिला सशक्तिकरण) हरियाणा, चेतना वशिष्ठ (नाटक निर्देशन) हरियाणा, डाॅ दर्शनी प्रिय (पत्रकारिता) दिल्ली, डोली मंडल (समाज सेवा) बिहार, ज्योति रीता (साहित्य) बिहार, कुमुदिनी सदाशिव नष्टे (समाज सेवा) महाराष्ट्र, लता प्रासर (साहित्य) बिहार, डाॅ ममता धवन (शिक्षा-समाज सेवा) दिल्ली, डाॅ ममता ठाकुर (चिकित्सा सेवा) दिल्ली, डाॅ मृदुला शुक्ला (साहित्य) झारखंड, निमिषा सिंह (पत्रकारिता) दिल्ली, प्रियंका सिंह (स्वास्थ चेतना जागरण) दिल्ली, प्रेम यादव (महिला सशक्तिकरण) हरियाणा, कुतुब किदबई (शांति और न्याय) मुंबई, ऋचा चौधरी (समाज सेवा) बिहार, रीता गुप्ता (योग) उत्तर प्रदेश, सुजाता (साहित्य व महिला विमर्श) दिल्ली, सुमना (मंजूषा कला) बिहार, डाॅ सुनीता (सोलो यायावरी) दिल्ली, उज्मा कलाम (महिला शिक्षा) राजस्थान, डाॅ ऋतु भनोट (साहित्य) पंजाब, संगीता श्रीकांत बढे (समाज सेवा) महाराष्ट्र, शशि मुदिराज (हिंदी संवर्धन) हैदराबाद, डाॅ सफिया खान (पुरातत्व और शोध) दिल्ली, शिल्पा अरुण कुमार वैष्णव (समाज सेवा) गुजरात, प्रबुद्ध अग्रणी महिलाओ को ‘भारतीय महिला शक्ति सम्मान-2022’ से नवाजा गया। सम्मान स्वरूप सम्मानित महिलाओ को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ व सम्मान पत्र प्रदान किया गया।

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‘भारतीय महिला शक्ति सम्मान-2022’ से नवाजी गई उत्तराखंड की लोकगायिका आशा नेगी द्वारा रचित गीतों मे पहाड़ का दर्द बयां हुआ है। इन रचित गीतों से मौलिक तौर पर उत्तराखंडी लोकसंस्कृति की दिशा, स्थानीय जनजीवन की दशा तथा उनके मूल्यों का खुलासा होता है। वर्तमान मे उत्तराखंड की यह अकेली एक ऐसी लोकगायिका हैं, जो ‘न्योली’ के साथ-साथ अन्य अनेकों उत्तराखंडी गायन विधाओ मे तनमय होकर गायन कर, उत्तराखंड के लोकगायन को जनमानस के मध्य स्मृद्ध कर, आज की युवा पीढ़ी के बीच प्रेरणाश्रोत बनी हुई हैं।

उत्तराखंड की अधिकतर गायन विधाओ में पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है। न्योली गायन मे पुरुषों के वर्चस्व पर अंकुश लगाने का काम जिला अल्मोड़ा सेरा घाट गांव कोटा मे जन्मी तथा तीसरी पास, वर्तमान मे दिल्ली (एनसीआर) मे प्रवासरत लोकगायिका आशा नेगी द्वारा 2017 मे संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी द्वारा उत्कृष्ट न्योली गायन हेतु ‘उस्ताद विस्मिल्ला खा युवा पुरूष्कार’ से सम्मानित होकर ख्याति अर्जित की है। उक्त सम्मान से नवाजी जाने वाली उत्तराखंड की यह पहली लोकगायिका बनी थी।

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उत्तराखंड की इस प्रख्यात लोकगायिका की रचनाओं व लोकगायन मे प्रकृति और जनजीवन का असर मौलिक व परंपरागत रूप में दृष्टिगत होता है। जो इस गायिका को अन्य गायक-गायिकाओ से विरल स्थान पर खड़ा करती है। इस विरलता के परिणाम स्वरूप ही विगत वर्षो मे, इस उभरती लोकगायिका को उत्तराखंड की प्रतिनिधि सांस्कृतिक संस्था ‘पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली’ के साथ-साथ देश के अन्य राज्यो मे गठित उत्तराखंड की अन्य विभिन्न प्रवासी प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थाओ द्वारा विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है

आयोजन के इस अवसर पर सम्मानित हुई महिलाओ के मध्य, मुख्य अतिथि विख्यात साहित्यकार ममता कालिया द्वारा व्यक्त किया गया, आज हाशिये खत्म होते जा रहे हैं। प्रत्येक स्त्री प्रत्येक कार्य कर सकती है। महिला शक्ति बहु विधा मे काम करती है। महिला जानती है, उसे कितना अपने आप को बांटना है, कितनी शक्ति लगानी है। हर स्त्री सिपाही की तरह हर मोर्चे पर खडी रहती है। चाहे वह घर की काम करने वाली हो या अंतरिक्ष में जाने वाली। आज कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां स्त्री न हो। ममता कालिया द्वारा व्यक्त किया गया, उन पुरुषों की तारीफ करनी होगी जो महिलाओ को आगे बढ़ना देखना चाहते हैं। स्त्री जो भी हो, दूरदर्षिता दिखाऐ। महिलाओ को स्वरोजगार व रोजगार की ओर बढ़ना चाहिए। अगर स्त्री के पास धन बल है, तो वह पुरुषों के आगे याचक नहीं बनेगी। स्त्री राजनीति के प्रति उदासीन रहती है। राजनीति में जाती है तो बिजली गिरा कर आ जाती है। वे महिलाऐ राजनीति में जाए जिनके पास उच्च विचार हों। स्त्रियों का जो भी कार्यक्षेत्र हो वह निर्णायक क्षेत्र हो। ममता कालिया द्वारा सभी सम्मानित महिलाओ को सम्मान प्राप्ति की बधाई व आयोजकों को सफल आयोजन की शुभकामना देने के साथ ही, संबोधन समाप्त किया गया।

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विख्यात कवियित्री व साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त, डाॅ अनामिका व अन्य सभी अति विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मान समारोह के इस अवसर पर व्यक्त किया गया, स्त्रियों को घराने तोड़ते हैं, सारी दीवारे तोडती हैं। स्त्रियों की कोई राजनैतिक पार्टी भी नहीं है। स्त्रियों की विधायिका शक्ति उनके बच्चे हैं। हर महिला के अंदर मातृत्व का गठना मुख्य होता है। अब स्त्रियां रोती भी नहीं, हंस देती हैं।

प्रबुद्ध वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, आंतरिक बातचीत से ही नाव बनती है। सबसे बडी आकाश गंगा की नाव है, जो मन से बनती है। अवमानना का दंश स्त्रियों को जोड़ता है, भाषा को जोड़ता है। स्त्री को मानवीय गरिमा को उठाना है। स्त्रियों के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा से ही रोजगार मिलता है। महिलाओं की शिक्षा से सशक्तिकरण समाज का होगा। स्त्री की शक्ति के बावत स्त्री ही लिख सकती है। कालांतर से ही स्त्री मे धैर्य, साहस, वीरता इत्यादि का समावेश रहा है।

सम्मान समारोह अध्यक्षता कर रहे अतुल प्रभाकर द्वारा व्यक्त किया गया, यह सम्मान औपचारिक सम्मान है। स्त्री को सदा सम्मान देना है। स्त्री मे संतुलन बनाने की क्षमता है। प्रकृति को भी संतुलन चाहिए। संतुलन शक्ति पुरुष मे नहीं, स्त्री मे होती है। स्त्री के सहयोग से पुरूष संतुलन बनाता है। हमारी संस्कृति मे स्त्री शक्ति को बहुत महत्व दिया गया है। स्त्री धन, शिक्षा की सरस्वती व शक्ति की काली के पीछे स्त्री रूप ही है। स्त्री शक्ति को पहचान लिया तो देश, समाज तरक्की करेगा।

सवित्री बाई फूले फाउंडेशन सचिव हेमलता म्हस्के द्वारा सभी मुख्य अतिथियों, वक्ताओ, सम्मानित महिलाओ व सभागार में बैठे सभी प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त कर, आयोजन समाप्ति की घोषणा की गई। सम्मान समारोह का मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत व वीनीता सिंह द्वारा बखूबी प्रभावशाली अंदाज में किया गया।
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