देश के मीडिया कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं के निराकरण पर मीडिया कन्फडरेशन का मंथन सम्पन्न

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सी एम पपनैं

नई दिल्ली। देश की बडी मीडिया फैडरेशनो, आईएफडब्लूजे, फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाईज यूनियन, एनएफएनई, एआईएनईएफ, आईजेयू तथा यूएनआई के पदाधिकारियों द्वारा गठित, ‘नेशनल कन्फडरेशन आफ न्यूज पेपर्स एंड न्यूज ऐजेन्सीज इंप्लाईज आर्गेनाईजेशन’ की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन 27 व 28 मार्च को नई दिल्ली स्थित, होटल रायल प्लाजा मे, मुख्य व विशिष्ट अतिथियो मे सुमार रहे, श्रममंत्री भारत सरकार भूपेन्द्र यादव, कैलाश सोनी व दीपक प्रकाश संसद सदस्य राज्यसभा, रूबी मनोहरन (विधायक तमिलनाडु), सी पी सिंह (पूर्व विधानसभा अध्यक्ष झारखंड), सुप्रिया श्रीनेत (राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस), अशोक उपाध्याय पूर्व संपादक यूएनआई, के विक्रम राव अध्यक्ष आईएफडब्लूजे, जयंत घोषाल वरिष्ठ पत्रकार तथा वेद प्रकाश प्रमुख मालवीय मिशन की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।

देश के प्रिंट, इलैक्ट्रोनिक व न्यूज ऐजेन्सीज मे कार्यरत मीडिया कर्मियो के सरोकारों तथा ‘लोकतंत्र मे, मीडिया की महती भूमिका’ विषय पर चर्चा हेतु आयोजित, इस बैठक मे, फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाईज यूनियन के देश के प्रत्येक राज्य से बडी संख्या मे फैडरेशन से जुडे सदस्यों द्वारा, फैडरेशन की वार्षिक महासभा तथा आईएफडब्लूजे द्वारा, वर्किग कमेटी सैशन की बैठक का आयोजन भी किया गया।

फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाईज यूनियन के तत्वाधान मे आयोजित, ‘नेशनल कन्फडरेशन आफ न्यूज पेपर्स एंड न्यूज ऐजेन्सीज इंप्लाईज आर्गेनाईजेशन’ की इस बैठक मे राष्ट्रीय फैडरेशनो से जुडे पदाधिकारियो मे, आईएफडब्लूजे महासचिव विपिन धूलिया, उपाध्यक्ष मोहन कुमार (पटना), गोपाल मिश्रा (दिल्ली), भी प्रतापा चंद्रन (केरल), उपेन्द्र राठौड़ (जयपुर), राजकिशोर मिश्रा (लखनऊ), संजय श्रीवास्तव (उत्तराखंड), नमिता बोरा (असम), मुकेश सेठ (मुंबई), विश्वदेव राव (लखनऊ), एनएफएनई राष्ट्रीय महासचिव चंद्र मोहन पपनैं (दिल्ली), नेशनल कन्फडरेशन आफ न्यूज पेपर्स एंड न्यूज ऐजेन्सीज इंप्लाईज आर्गेनाईजेशन अध्यक्ष डाॅ इंदुकांत दीक्षित (रांची), नेशनल कन्फडरेशन उपाध्यक्ष मनोज मिश्रा (लखनऊ), अतानु पाल पीटीआई फैडरेशन अध्यक्ष (कोलकत्ता), बी आर प्रजापति आईजेयू अध्यक्ष (गुजरात) व आईजेयू महासचिव जी प्रभाकर (केरल), एआईएनईएफ महासचिव गोविंदा भूपति (चेन्नई), फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाईज यूनियन महासचिव बलराम सिंह दहिया (दिल्ली) की उपस्थिति मुख्य रही।

आयोजित नेशनल कन्फडरेशन की बैठक को भूपेंद्र यादव केन्द्रीय श्रममंत्री भारत सरकार द्वारा, संबोधित कर व्यक्त किया गया, सबके बारे मे जानना पत्रकारों की जिम्मेवारी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों से पत्रकारिता कर रहा पत्रकार, पत्रकारिता से जुडे सारे कार्य करने के बावजूद, कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। डिजिटल क्रांति के दौर मे, छोटी पत्र-पत्रिकाऐ सिमट रही हैं। छोटे-छोटे शहरो मे भी, पत्रकारिता का कम्पडिशन हो रहा है। खबर मे तथ्य हो, सच हो, पूर्वागृह न हो तो, विश्वसनीयता बनी रहती है। बिना झुके मानदंडों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। तकनीक बदल चुकी है। सोशल मीडिया का प्रभाव काफी बढ़ गया है। पत्रकारो के समक्ष वर्किंग कन्डीशन मुख्य समस्या है। श्रममंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा, नए श्रम कानूनों की खूबियों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला गया। अंतरराष्ट्रीय मानको के साथ श्रम कानूनों में परिवर्तन व महिलाओ को श्रम के क्षेत्र मे, बराबरी के हक के कानून, पीएफ व ईएसआई मे डिजीटल कमेटी बनाने का जिक्र तथा नेशनल ट्रिब्युनल मे प्रेजाइडिंग आफिसर जल्द नियुक्त करने की बात, श्रममंत्री द्वारा की गई।

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पत्रकार संगठनो की दो दिनों तक चले मंथन में, अन्य आमन्त्रित विशिष्ट वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, मीडिया सबकी बात करता है, मीडिया वालों की बात करने वाला कोई नहीं है। पत्रकार अपने अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए अपनी बात नहीं रख सकता, क्यों कि सुनने वाला कोई नहीं है। छोटे व मझोले अखबार व पत्र-पत्रिकाऐ बंद हो चुकी हैं। कुछ बंद होने की कगार पर हैं। एक मजदूर को जब सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है तो, पत्रकार को क्यों नही? उसका भविश्य सुरक्षित क्यों न हो?

आमन्त्रित विशिष्ट वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, आवश्यक्ता है पत्रकारों के हित में कैसे काम करे। मीडिया जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करता है। बिना मीडिया के लोकतंत्र की कल्पना नहीं कर सकते। जब पत्रकारों की बात की जाती है, तो आज का मीडिया जिसे कारपोरेट चला रहा है, उसे स्थान नहीं देता है। वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, पत्रकारो से सत्ताधारियों को दुविधा होती है, इसीलिए उन्हे नकारा जा रहा है। आज अघोषित आपातकाल है। टीआरपी का खेल चल रहा है। पत्रकार आज खुद कहानी बन गया है। देश के बडे उद्योगपति मीडिया चला रहे हैं। पत्रकारो के न्यूनतम वेतन की बात भी नही होती है, काम सारे कराए जा रहे हैं। समय ऐसा बना दिया गया है, कि आज का पत्रकार मंत्री से सवाल तक नहीं पूछ सकता है। सरकारी विज्ञापन छोटे व मझोले पत्र-पत्रिकाओ के लिए बंद कर दिए गए हैं। महात्मा गांधी के विपरीत जो कहा जा रहा है, मीडिया चुप क्यों है? लोकतंत्र में सजग, स्वतंत्र व निर्भीक पत्रकार की जरूरत है। सोशल मीडिया पत्रकारो की समस्या को दिखा रहा है।

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व्यक्त किया गया, बिना मीडिया के संसद भी नही चल सकती। अखबार का हवाला देकर ही संसद में चर्चा होती है व अंत होता है। स्वतंत्रता आंदोलन व लोकतंत्र को चलाने का काम पत्रकारो ने किया है। पत्रकार की अपनी व्यक्तिगत खबर नहीं होती, देश के सरोकारों के लिए, वह लिखता है। आज राजनीति सबसे ऊपर चढ़ गयी है। साहित्यिक आयोजनों मे भी, नेता की जरूरत पड़ रही है। इस दवाब को रोकने की जरुरत है। रचनात्मक्ता है, सृजन जो आंख खोल रहा है, उस ओर जाना जरूरी है। जनप्रतिनिधियों का अपनी सुविधाऐ बढ़ाने की ओर ध्यान है।

व्यक्त किया गया, कुर्सी का स्वभाव है, नींद आना, पत्रकार का काम है उसको जगाना। मीडिया संगठित हो, चुनौती बढ़ गई है, शक्तिशाली लोगों के खिलाफ लिखने की। समाज को ठीक लिखने वालों के साथ खड़ा होना होगा। लोकतंत्र को मजबूत करने मे मीडिया की बडी भूमिका है, यह तभी सम्भव हो पायेगा, जब मीडिया स्वतंत्र होगा। पत्रकारो के हित में बना एक्ट 1955 सुरक्षित रह पायेगा। वेतन आयोग गठित होता रहेगा।

मीडिया द्वारा निभाई गयी बडी भूमिका व वर्तमान मे मीडिया की भूमिका के सही व गलत पर भी सवाल, वक्ताओ द्वारा खडे किए गए। व्यक्त किया गया, चार दशक पूर्व जो पत्रकारों का महत्व होता था, जो रुतवा होता था, आज क्षरण की ओर बढ़ रहा है। वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया। आज भी निडर पत्रकार हैं, अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रबुद्ध वक्ताओ द्वारा, मीडिया की जवाब देही तय करने पर जोर दिया गया। व्यक्त किया गया, नहीं तो, मीडिया व्यवसाय मे बदल जायेगा। मीडिया कर्मियों को स्वय मे भी आत्मबल लाना होगा।

देश की दो बडी न्यूज ऐजेन्सी पीटीआई व यूएनआई की बिगडती हालत पर भी वक्ताओ द्वारा, ध्यान खीचा गया। सरकार द्वारा जारी आर्थिक मदद के बंद होने के बावत अवगत कराया गया। उक्त दोनों न्यूज ऐजेन्सी को न बचा पाने पर, समाचारों की विश्वसनीयता खत्म होने की आशंका व्यक्त की गई। स्थापित सरकारो को, उक्त न्यूज ऐजेन्सी को संरक्षण देने की बात, वक्ताओ द्वारा की गई।

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वक्ताओ द्वारा, मीडिया मे ठेकेदारी प्रथा लादने के बाद, मीडिया का स्तर गिरने की बात भी कही गई। सम्पूर्ण मीडिया से ठेकेदारी प्रथा हटाने को बल दिया गया। मीडिया कर्मियों को पेंशन व सामाजिक सुरक्षा पर गम्भीरता पूर्वक वक्ताओ द्वारा बात रखी गई। स्वतंत्र व निर्भीक पत्रकारिता की चाह मे, देश के सभी मीडिया कर्मियों को एकजुट होकर, आज के मीडिया घरानों व सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ खडे होने का आहवान वक्ताओ द्वारा किया गया।

फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाइज यूनियन के मुख्य कार्यालय पर भी, नेशनल कन्फडरेशन आफ न्यूज पेपर्स एंड न्यूज ऐजेन्सीज इंप्लाईज आर्गेनाईजेशन के पदाधिकारियों द्वारा फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाइज यूनियन के बडी संख्या में उपस्थित कर्मचारियों के साथ संयुक्त आमसभा का आयोजन कर, पीटीआई प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। आमसभा को आईएफडब्ल्यूजे अध्यक्ष के विक्रम राव, महासचिव विपिन धूलिया, एनएफएनई राष्ट्रीय महासचिव चंद्र मोहन पपनैं व कन्फडरेशन अध्यक्ष डाॅ इंदूकांत दीक्षित द्वारा सम्बोधित किया गया।

फैडरेशन आफ पीटीआई इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा देश के विभिन्न राज्यो से कन्फडरेशन बैठक में पहुचे, सभी फैडरेशन पदाधिकारियों को पुष्पगुच्छ, स्मृतिचिन्ह व उपहार देकर, सम्मानित किया गया। डाॅ इंदूकांत दीक्षित द्वारा अवगत कराया गया, कन्फडरेशन का एक बड़ा प्रतिनिधि मंडल, एक हफ्ते मे श्रममंत्री से मुलाकात कर, मीडिया कर्मियो की समस्याओं व मांगो पर विस्तृत चर्चा कर, समस्याओ को सुलझाने व मांगे मनवाने की पहल करेगा।पीटीआई फैडरेशन के महासचिव बलराम सिंह दहिया के समापन उदबोधन के साथ ही, मीडिया फैडरेशनो की दो दिनी संयुक्त बैठक के समापन की घोषणा की गई।

मीडिया फैडरेशनो के पदाधिकारियों द्वारा गठित कन्फडरेशन की बैठक का प्रभावशाली मंच संचालन कन्फडरेशन अध्यक्ष व पीटीआई रांची प्रमुख डाॅ इंदूकांत दीक्षित द्वारा, बखूबी, प्रभावशाली अंदाज में किया गया।
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