एक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी की याद

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स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अथक योगदान देने वाले ऐसे कई सेनानी रहे है जिनकी स्वतंत्रता उपरांत देश में आती-जाती सरकारों ने कोई सुध नहीं ली, इतना ही नहीं समाज में भी उनके अथक योगदान को पूरी ईमानदारी के साथ प्रस्तुत नहीं किया जा सका। ऐसी ही विस्मृत कर दी गई शख्सियत थे स्व0 राम दत्त नेगी। स्व0 नेगी एक ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिनमें छटपटाहट थी कि कैसे परतंत्र भारत स्वतंत्रता की अंगड़ाई ले ,साथ ही सामाजिक बुराईयों से समाज को बचाने के लिए भी स्व0 नेगी ने भरपूर प्रयास किए। इस राष्ट्र सेवक को अपनी संकल्पित लड़ाई के कारण न केवल दो बार जेल जाना पड़ा अपितु कई बार अंग्रेजों के पद दलन का भी सामना करना पड़ा।
स्वतंत्रता संग्राम के इस रण बांकुरे का जन्म सन 1872 में पाली पंछाऊ में तिल लाल नेगी के घर में हुआ। इस राष्ट्र सेवक नेे आजीविका के लिए रानीखेत को चुना जरूर, लेकिन उनका राष्ट्र मन तो देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए व्यग्र था। रानीखेत में भी स्व0 राम दत्त नेगी एक किराए के मकान में रहते हुए यहां की तरूणाई में देशप्रेम और समाज सेवा की अलख जगाते रहे। इस गांधीवादी मुहिम में उन्हें हरिदत्त कांडपाल,राम सिंह, देवी राम, पीर जी, पुत्तन खां, अब्दुल डायस, और युसूफ भाई जैसे राष्ट्र भक्तों का साथ मिला।स्व0 राम दत्त नेगी की निर्भीकता और देश भक्ति के अनेक किस्से बुजुर्ग बयानी में सुनने को मिलते हैं। बात सन 1928-29 के दरमियान की है, ब्रितानी सिटी मजिस्ट्रैट रानीखेत बाजार के मुआयने पर निकला था ,राम दत्त नेगी अपनी दुकान के सामने बैठे थे सिटी मजिस्ट्रैट ने अपनी गाड़ी रोकी मगर उसे देख राम दत्त नेगी खड़े नहीं हुए। ब्रितानी अधिकारी क्रुद्ध हो उठा। उसने राम दत्त नेगी को अपशब्द कहे तो राम दत्त भिड़ गए। खूब तू तू- मै मै हुई। राम दत्त नेगी पर मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन बाद में राम दत्त मुकदमा जीत गए।
1932 में तत्कालीन जिला परिषद सदस्य गंगा दत्त फुलारा कांग्रेस के सक्रिय सदस्य थे। उनके साथ राम दत्त नेगी ग्रामीण क्षेत्र में स्वतंत्रता के प्रति जन जागरण करने निकल पड़े। खरक गांव में एक ऊंचे स्थान पर खड़े होकर दोनों राष्ट्र सेवकों ने वंदे मातरम के उदघोष के साथ स्वतंत्रता के लिए एकत्र होने की धात लगाई। आश्विन माह होने से ग्रामीण खेतों में थे ग्रामीण खेती कार्य छोड़ कर एकत्र हुए। गांव के हरिकृष्ण शर्मा के घर चैपाल लगी जिसमें राम दत्त नेगी और गंगा दत्त ने ग्रामीणों को राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए जागृत किया।
राम दत्त नेगी में राष्ट्र प्रेम का जज्बा बाल्यपन से ही था। 17जून 1929 को जब महात्मा गांधी ताड़ीखेत प्रवास पर आए तो राम दत्त नेगी और हरिकृष्ण शर्मा ने भी गांधी जी से मुलाकात कर स्वतंत्रता का मंत्र लिया। इस मुलाकात के बाद राम दत्त नेगी का राष्ट्र प्रेम का जज्बा द्विगुणित हो गया। गांधी जी की प्रेरणास्पद बातों को तब कुमाऊं केसरी बद्री दत्त पांडे स्वयं ध्वनि विस्तारक बन कर क्षेत्र जनों तक पहुंचा रहे थे। राम दत्त नेगी में स्वाभिमान भी कूट-कूट कर भरा था। वह अपनी बात मनवा कर ही छोड़ते थे। इस बात को इस घटना से समझ सकते हैं। दौला गांव के बची राम नामी पेशकार थे। बची राम गोरों के बेहद करीब थे। एक बार जब राम दत्त नेगी को पकड़ने के लिए अंग्रेज पुलिस गांव पहुंची तो राम दत्त नेगी अकड़ गए उन्होंने बिना घोड़े के साथ जाने से इन्कार कर दिया ऐसे में पेशकार बचीराम को अपना घोड़ा राम दत्त नेगी को देकर अंग्रेजों के सुपुर्द करना पड़ा।
एक घटना तीस के दशक के शुरूआती दौर की है। रानीखेत के पुरानी आबकारी मुहल्ले में तब शराब भट्टी हुआ करती थी। जिसकारण यहां के रहवासी शराबियों के उत्पात और अशांति से परेशान थे ऐसे में राम दत्त नेगी और हरिदत्त कांडपाल और अनेक राष्ट्र सेवकों ने शराब का सेवन करने वालों के मध्य जन जागरण किया। जब इसमें भी पूर्ण सफलता न मिली तो राष्ट्र सेवकों ने शराब ठेका भट्टियों के बाहर शांतिपूर्ण धरना दिया। एक दिन भट्टी के बाहर करीब चालीस पैतालिस राष्ट्र सेवक लेट गए ऐसे में शराब ठेकेदार नेे अंग्रेज प्रशासन से मिल कर लेटे राष्ट्र सेवकों को शराब प्रेमियों के जूतों से कुचलवा कर उन्हें शराब भट्टी में प्रवेश कराया गया।शराब प्रेमियों को मुफ्त शराब पिलाकर पद दलन का यह क्रम दिन भर चला और घायल राष्ट्र सेवकों ने जिनमें राम दत्त नेगी भी थे यातना के बाद भी उफ नहीे की। एक राष्ट्र सेवक कोटुली के पंत जी की बूट से कुचलने से आंख तक बाहर निकल आई थी। स्वतंत्रता पाने का जुनून राम दत्त नेगी और हरिदत्त कांडपाल सरीखे राष्ट्र भक्तों में इस हद तक था कि यातनाएं सहने के बाद भी वे पुनः स्वतंत्रता के लिए जनजागरण में जुट जाते। इस दौरान हरिदत्त कांडपाल और राम दत्त नेगी को रानीखेत बाजार में कई बार निर्ममता से पीटा।

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कृतघ्न समाज और सरकारों की उपेक्षा के कारण राम दत्तनेगी भी कइयों की तरह गुमनाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का ओहदा लेकर ईहलोक को प्रयाण कर गए।स्व0 राम दत्त नेगी की जीवन साधना और राष्ट्रभक्ति की भावना भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा पुंज है।स्व0 नेगी की राष्ट्र साधना से समाज ने क्या शिक्षा ली? यह भले ही उत्तर तलाशता प्रश्न हो किंतु उनके पौत्रों में समाजसेवा की भावना विरासतन देखी जा सकती है। उनके पौत्र मोहन नेगी आज सामाजिक अभियानों में अपना सक्रिय योगदान दे रहे हैं। वह समाज सेवा के क्षेत्र में हर तबके की सहायता के लिए तत्पर रहते हैंऔर इस कारण समाज में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान भी बनाई है। वहीं ज्येष्ठ पौत्र पूरन नेगी को शिव मंदिर एवं धर्मशाला कमेटी और मुक्ति धाम में निस्वार्थपूर्ण लगन से जुटे देखा जा सकता है।
समाज सुधार और राष्ट्र सेवा के लिए सदैव अग्र पांक्तेय सिपाही की तरह अडिग रहे स्व0 रामदत्त नेगी को प्रकृतलोक पत्रिका परिवार ने मरणोपरांत नागरिक सम्मान देकर सम्मानित किया।जिसे उनके पौत्र दम्पति ने ग्रहण कर रानीखेत को गौरवान्वित किया।

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