ब्रेकिंग न्यूज़:रानीखेत को रक्षा मंत्रालय ने दिया नए साल का तोहफा, वाहन प्रवेश शुल्क किया समाप्त, आज शाम से ही टोल बैरियर हुए सूने

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रानीखेत : रानीखेत के रहवासियों ,व्यवसायियों और यहां घूमने आने वाले सैलानियों के लिए बडी़ खबर है।रक्षा मंत्रालय ने रानीखेत छावनी परिषद सहित अन्य छावनियों से वाहन प्रवेश शुल्क समाप्त कर दिया है। आज रक्षा मंत्रालय से आदेश पहुंचने के बाद यहां के पिलखोली,घिंघारीखाल ,गनियाद्योली आदि एंट्री टैक्स बैरियरों पर शाम 7:30बजे से वाहनों से प्रवेश शुल्क की वसूली बंद कर दी गई और इसकी सूचना भी अविलम्ब रक्षा मंत्रालय को दे दी गई।
आपको बता दें कि पूर्व में अन्य छावनी क्षेत्रों की भांति रानीखेत में भी चुंगी प्रथा लागू थी।1991 में अविभाजित उ.प्र में सरकार ने नगरपालिकाओं में चुंगी प्रथा समाप्त कर दी ऐसे में रानीखेत में भी छावनी नागरिकों की ओर से चुंगी वसूली समाप्त करने की मांग जोर-शोर से उठने लगी थी। 2006 में छावनी अधिनियम संशोधन में टोल टैक्स की जगह व्हीकल एंट्री टैक्स की व्यवस्था दी गई,हालांकि रानीखेत छावनी में टोल टैक्स की व्यवस्था जारी रही और वाहन प्रवेश शुल्क वर्ष 2012 से लागू किया गया जो आज तारीख तक जारी रहा।आज रक्षा मंत्रालय से आए फरमान के बाद तुरंत ही शाम से टोल टैक्स चौकियों पर झुके बैरियरों को उठा दिया गया।
इधर रक्षा मंत्रालय की ओर से रानीखेत सहित ऐसी छावनियां जहां वाहन प्रवेश शुल्क लागू है ,को निदेशक भूमि ,शर्मिष्ठा मित्रा की ओर से भेजे निर्देश में कहा गया -‘यह देखा गया है कि छावनी द्वारा बैरिकेड्स,नाका लगाकर वाहन प्रवेश शुल्क की वसूली माल और यातायात के सुचारू संचालन की दिशा में सरकार की पहल के अनुरूप नहीं है और जीवन को आसान बनाने के प्रयासों को बाधित करती है।इसलिए, यह निर्णय लिया गया है कि छावनी बोर्डों द्वारा वाहन प्रवेश शुल्क की वसूली को तुरंत रोक दिया जाए, राज्य सरकार की एजेंसी / नगरपालिका से उनके द्वारा केंद्रीय रूप से वाहनों के प्रवेश पर लगाए जा रहे समान शुल्क में से आनुपातिक हिस्सा मांगने के तंत्र पर विचार किया जा सकता है।निर्देश में वाहन शुल्क की वसूली तुरंत बंद कर अनुपालन रिपोर्ट तत्काल रक्षा मंत्रालय को भेजने को कहा गया है।

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रक्षा मंत्रालय के नव वर्ष पर दिए इस तोहफे से निश्चित ही व्यवसायियों, सैलानियों और स्थानीय नागरिकों की जेब पर बोझ कम होगा ।रानीखेत छावनी के नागरिकों में रक्षा मंत्रालय द्वारा वाहन प्रवेश शुल्क वसूली बंद करने के फैसले पर खुशी जतायी है।हालांकि इस फैसले से छावनी परिषद को आर्थिक रुप से नुकसान लाजमी है ।बताया जता है छावनी परिषद को वाहनों से अनुमानित डेढ़ करोड़ रुपया राजस्व प्राप्त हो रहा था।

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