कांग्रेस जन प्रतिनिधियों पर समर्थकों के नाम टेंडर करवाने की कोशिश का आरोप लगाया

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रानीखेत : “मेरी गांव मेरी सड़क योजना” के तहत शनिवार को ब्लाक मुख्यालय में हुई ‌टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से विवादों में आ गई है। टेंडर प्रक्रिया से वंचित रहने वाले लोगों का कहना है कि ब्लाक मुख्यालय की तरफ से छल कपट कर उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रख दिया गया, जबकि वह लोग नियत समय पर वहां मौजूद थे। कुछ कांग्रेस के जनप्रतिनिधि उन्हें टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से उलझाते रहे, टेंडर बाक्स भी बीडीओ कक्ष के बजाए दूसरे कमरे में थे। इधर बीडीओ ताडी़खेत का कहना है इस मामले में जांच शुरू हो गई है।

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बताया जा रहा है कि मेरी सड़क मेरी गांव योजना के तहत मेहरखोला गांव के लिए स्वीकृत सड़क के टेंडर पड़ने थे। शनिवार को टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह से विवादों में आ गई। टेंडर प्रक्रिया से वंचित रह गए जगदीश बिष्ट और हेमंत अधिकारी ने प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया, आरोप हैं कि कांग्रेस पक्ष के तीन लोगों ने गुपचुप तरीके से टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया, जबकि टेंडर डालने के लिए चौथा नंबर उनका था, उन्हें किसी तरह से टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखने की साजिश रची गई। जबकि वह लोग वहां समय पर मौजूद थे, उनका आरोप है कि एक पक्ष के लोगों को लाभ दिलाने के लिए ब्लाक मुख्यालय की तरफ से पूरी तरह धांधली बरती गई, टेंडर बॉक्स तक छिपा दिए गए, दूसरे पक्ष के कुछ लोग समय पर उन्हें उलझाते रहे, जब वह किसी तरह से धक्कामुक्की कर टेंडर डालने गए तो उनसे कह दिया गया कि अब समय समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास इस मामले के पूरे साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने सीडीओ से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है। साथ ही कहा कि पूरे घटनाक्रम के साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं वह जांच समिति को इसे सौंपेंगे।

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इधर बीडीओ ताडी़खेत रवि सैनी ने कहा है कि शनिवार को 12 बजे तक सड़क के टेंडर की कार्रवाई नियत थी, प्रक्रिया में कोई धांधली नहीं हुई है, पूरी प्रक्रिया शासन के नियमानुसार की गई है। असंतुष्ट पक्ष के लोग 12 बजे के बाद टेंडर डालने पहुंचे थे। इस मामले में उच्च स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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