सरकार ने की विद्युत कर्मियों की हड़ताल निषिद्ध घोषित, हड़ताल का पहले दिन दिख रहा असर,जनता की बढी़ परेशानी

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देहरादून: उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की हड़ताल को सरकार ने निषिद्ध घोषित कर दिया है।इस बावत शासन से अधिसूचना जारी की गई है।हालांकि दूसरी ओर ऊर्जा कर्मियों को मनाने के लिए बैठकें भी जारी रहीं।शासन ने तीनो निगमों में हड़ताल पर 6माह के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के कदम से ऊर्जा कर्मियों में आक्रोश हैउनका कहना है कि मांगों की अनदेखी पर एक माह पहले ही हड़ताल का नोटिस दे दिया गया था।

आधी रात से जारी हड़ताल का असर दिखने लगा है।हड़ताल के बाद  मंगलवार को उत्तरकाशी में सुबह मनेरी भाली एक और मनेरी पाली दो की टरबाइन थमी गई है। जिससे विद्युत उत्पादन ठप हो गया है। मनेरी भाली एक से प्रतिदिन 90 मेगा वाट व मनेरी भाली द्वितीय से प्रतिदिन 304 मेगावाट बिजली उत्पादन होती है। दोनों परियोजनाओं पर अर्द्ध रात्रि से उत्पादन ठप है।  जिससे प्रतिदिन करीब सवा करोड़ राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं, राज्य के कई इलाकों में बिजली गुल है। 

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उल्लेखनीय है कि सोमवार मध्य रात्रि से रात 14 सूत्री मांगों को लेकर यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल के 10 संगठनों के करीब 3500 से अधिक बिजली कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं । इसके तहत कर्मचारी न तो यूजेवीएनएल के विद्युत गृहों पर काम कर रहे हैं और न ही बिजली से जुड़ी किसी भी गतिविधि में सहयोग ही कर रहे हैं।उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के लगभग सभी पावर हाउस में बिजली उत्पादन रुक गया है।
रात से मलेरी भाली परियोजना ठप होने की वजह से सरकार ने करीब 250 मेगावाट बिजली एनटीपीसी से ली है।देहरादून के सभी बिजली घरों में ताले लगे हैं। उर्जा निगम में आज ऊर्जा सचिव सहित अन्य अधिकारी हड़ताली कर्मचारियों को समझाने में जुटे रहे लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों से नीचे आने को तैयार नहीं हुए।माना जा है हड़ताली कर्मचारी अगर हड़ताल पल अडिग रहे तो विद्युत उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ सकती है विशेषकर विद्युत लाइनों में तकनीकी खराबी आने पर इन्हें फिलहाल दुरूस्त नहीं किया जा सकेगा।

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