पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय रानीखेत में 21 वीं सदी में लर्निंग एंड इन्फॉर्मेशन स्किल के अंतर्गत मीडिया लिटरेसी विषय पर कार्यशाला का आयोजन,प्रिंट मीडिया में समाचार लेखन, प्रस्तुतिकरण तथा प्रिंट मीडिया की सामाजिक बदलाव में भूमिका पर चर्चा

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रानीखेत– यहां पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में 21 वीं सदी में लर्निंग एंड इन्फॉर्मेशन स्किल के अंतर्गत मीडिया लिटरेसी विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।प्रिंट मीडिया में समाचार लेखन एवं प्रस्तुतिकरण तथा प्रिंट मीडिया की सामाजिक बदलाव में भूमिका पर बतौर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार विमल सती ने विचार रखते हुए कहा कि संचार क्रांति के युग में मीडिया का मिज़ाज बदला है लेकिन प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता और तेज आज भी कायम है।

अपने व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार विमल सती ने मुद्रण पत्रकारिता के क्रमोत्तर विकास पर प्रकाश डाला साथ ही विद्यार्थियों को समाचार लेखन के गुर बताए। उन्होंने कहा कि सामान्य समाचार प्रत्याशित व अप्रत्याशित स्रोतों से मिलते हैं,मगर खोजपरक समाचार में किसी एक विषय का कोई एक सूत्र हाथ आने के बाद लगातार काम करना पड़ता है इसे दबाने की भी समानांतर कोशिश चलती है जब खबर ब्रेक होती है तो बड़े स्तर पर सबको चौंकाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को ठोस समाचार और व्याख्यात्मक समाचार का अंतर समझाते हुए विलोम पिरामिड और सीधे पिरामिड में समाचार लेखन की शैली बताई। उन्होंने कहा कि समाचार संकलन के वक्त क्या, कहां, कब, कौन और कैसे यानी इन पांच क का जवाब तलाशा जाना चाहिए, इसके बिना कोई भी घटना की खबर अपूर्ण कही जाएगी।
वरिष्ठ पत्रकार श्री सती ने समाचार प्रस्तुतिकरण पर बोलते हुए कहा कि समाचार में शीर्षक छोटा लेकिन ध्यानाकर्षित करने वाला होना चाहिए, शीर्षक की छूटी बात को उप शीर्षक से पूरा किया जाता है। डेटलाइन के बाद इंट्रो यानी आमुख कम शब्दों में आकर्षक होना चाहिए यही समाचार की आत्मा है जिससे पूरे समाचार का सारांश मालूम होता है। वर्तमान दौड़ भाग भरी जिंदगी में कई लोग आमुख पढ़कर ही संतृप्त हो जाते हैं वे समाचार के विवरण और निष्कर्ष तक नहीं जाते।
उन्होंने आज़ादी पू्र्व समाचारपत्रों की राष्ट्रीय आंदोलन और आज़ादी उपरांत जन आंदोलनों में रही भूमिका पर भी प्रकाश डाला साथ ही उदाहरण देकर समाचार पत्रों को सामाजिक बदलाव का प्रमुख अस्त्र बताया।
श्री सती ने मूल्य आधारित पत्रकारिता की बात करते हुए कहा कि समाचार सत्य निष्पक्ष और बेबाक होना चाहिए।हर वर्ग से इसका जुड़ाव होना चाहिए और इसमें समयानुकूल विविधता का समावेश होना चाहिए। उन्होंने एडवोकेसी जर्नलिज्म यानी पक्ष समर्थन की पत्रकारिता को समाज के लिए हानिकारक बताया और जनपक्षीय पत्रकारिता को वंचित शोषित वर्ग के हित में बताया। बारहवीं के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने पत्रकारिता में करियर बनाने हेतु उनका मार्गदर्शन किया।

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इससे पूर्व विद्यालय के शिक्षक श्री दीपक चंद्र जोशी (पीजीटी हिंदी)ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। कार्यशाला के समापन पर प्रधानाचार्य श्री राकेश धर दूबे ने वरिष्ठ पत्रकार विमल सती का विद्यार्थियों का अपने उपयोगी व्याख्यान से मार्गदर्शन करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों से समाचार लेखन की बताई गई शैली को प्रायोगिक रुप में अपनाकर विद्यालय की गतिविधियों पर समाचार लिखने को प्रेरित किया।

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