रानीखेत सहित चार जिलों के लिए बने पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करे सरकार

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विधि आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष दिनेश तिवारी एडवोकेट ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से माँग की है कि वह जिलों के पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करें कहा कि यह भी बताएँ कि जिलों के पुनर्गठन में विलम्ब क्यों हो रहा है ?
उन्होंने कहा कि सरकार को जनहित में यह भी बताना चाहिये कि प्रदेश में नये जिलों के निर्माण के लिये बनाये गये पुनर्गठन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी भी है या नहीं ,कहा कि वर्ष २०११ में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य में चार नये जिलों के गठन की घोषणा की थी और इन जिलों के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी थी लेकिन ये जिले आज तक अस्तित्व में नहीं आ सके ।
कहा कि आज़ादी की ६५वीं वर्षगाँठ पर देहरादून में परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक ने कोटद्वार को पौड़ी से काट कर यमनोत्री को उत्तरकाशी से डीडीहाट को पीठोडागड़ से और रानीखेत को अलमोडा से अलग कर नये जिलों के गठन की घोषणा की थी और कहा था कि छोटी प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण से जनता को सुविधा तो होती ही है प्रशासन का काम भी बेहतर होता है कहा कि निशंक ने तब यह भी कहा था कि नये जिलों के गठन का काम निरंतर चलता रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर और भी जिले बनाये जायेंगे कहा कि राजनैतिक दबाव के कारण निशंक सरकार अपनी अधिसूचना को अमली जामा पहनाने से पीछे हट गयी कहा कि वर्ष २०१२ में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने जिलों के गठन के लिये समिति बनायी और इस समिति ने जिलों का चयन भी किया ।
उन्होंने कहा कि लेकिन नये जिलों के गठन की हिम्मत कांग्रेस सरकार भी नहीं दिखा सकी आरोप लगाया कि विधानसभा क्षेत्र में संतुलन साधने के चक्कर में प्रदेश में घोषित चार जिलों के गठन की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाला गया है कहा कि रानीखेत में स्टेडियम को आज तक जगह नहीं मिली है और दलमोटी को रिज़र्व टाइगर ज़ोन और ज़ू का दर्जा नहीं मिल सका है ।कहा कि जनता से लगातार झूठ बोलने और झूठे वायदे से लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों पर से जनता का भरोसा कम होता है ।कहा कि चुनाव वर्ष में प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह २०१२ में घोषित चार जिलों के गठन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करें।

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