काव्य गोष्ठी में कवियों की रचनाओं से भावविभोर हुए श्रोता, मातृभाषा के यश गान से गूंजता रहा वातावरण

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रानीखेत: हिंदी पखवाड़ा के अवसर पर यहां छावनी इंटर कॉलेज के सभागार‌ में साहित्य मंच ‘कविजन हिताय’ द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से‌ श्रोताओं को भावविभोर किए रखा।लगभग साढ़े तीन घंटे तक श्रोताओं ने दत्तचित्त होकर‌ कविताओं का रसास्वादन किया।

काव्य गोष्ठी में कवयित्री गीता जोशी ने हिंदी पर अभिमान करते हुए अपनी रचना में कहा’रची बसी जो रोम-रोम में, पुलकित कर देती है क्षण में ‘ वहीं उभरती हुई कवयित्री अंकिता पंत ने पिता-पुत्री के संबंधों पर कविता पाठ करते पिता के मर्म को व्यक्त करते हुए कहा कि ‘बेटी मेरे हर एक दिन को पुराना होने नहीं देती’नवोदित कवयित्री शक्ति वर्मा ने अपनी भावपूर्ण रचना में बुद्ध के गृहस्थ त्याग पर कहा कि ‘स्त्री कभी बुद्ध नहीं बन पाएगी’ उभरती कवयित्री प्रीति जोशी ने अपनी उत्तराखंड पर‌ अपनी गेय रचना में कहा कि’प्यारे उत्तराखंड इन दिनों खूबसूरती को तुम्हारे दाग कहा जा रहा है’ बग्वालीपोखर से आए युवा कवि विशाल फुलारा ‘सानू’ राष्ट्र प्रेम से पूरित अपनी रचना में कहा’वीरों की धरा की रज है,जन कवियों की बानी है, कश्मीर से कन्याकुमारी तक ये एकता की निशानी है’। वहीं युवा कवि गौरव भट्ट ने जीवन संघर्ष पर कुछ यूं कहा’ अपने सपनों के लिए उजाले संजो रहा हूं मैं, अंधेरों में जाग-जाग कर सूरज बो रहा हूं मैं ‘ ।

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कवि व लेखक‌ विमल सती ने हिंदी के गौरव का वर्णन करते हुए अपनी रचना यूं पेश की ‘रस है रागत्व हिंदी,भारत का है स्वत्व हिंदी,भारत का निजत्व हिंदी, एक‌ राष्ट्र का तत्व हिंदी’, आओ अपनी हृदय धरा पर हिंदी को विस्तार दें’।

युवा देव पहाड़ी ने धर्म पर रचना पढ़ते हुए कहा’ मैं धर्म हूं जो जन्म और मृत्यु के बीच झूलता है’। नवोदित रचनाकार प्रीति पंत ने हिंदी के लिए लिए कहा ‘देवों के भाषा से बनी देवनागरी लिपि हमारी’ ।गीता पवार ने वर्तमान में स्त्री को खुला आसमान मिलने के संतोष को कुछ इस तरह व्यक्त किया’ आज की महिला है बिंदास,न लाचार ,न,बेबस न उदास’। कवयित्री मीना पांडे ने अपनी गीत शैली में प्रस्तुत रचना में हिंदी के प्रति अगाध लगाव को व्यक्त किया ‘सखी हिंदी तुम्हारे प्रेम के मैं गीत गाती हूं, तुम्हारे संग मैं शब्दों के जादू खेल जाती‌ हूं’ डा.विनीता खाती ने बेटियों को बेहतर साबित करते हुए अपनी रचना में कहा’ये बेटियां लाजवाब होती हैं’। सीमा भाकुनी ने अपनी रचना ‘हिंदी लिपि देवनागरी जिसकी वैज्ञानिकता है ‘प्रस्तुत की। कवि हंसा दत्त पांडे ने अपनी कविता अभिप्रेरणा से जीवन पथ की सीख देकर सबको प्रभावित किया। वहीं नवोदित कवयित्री भावना रौतेला मेहरा ने मां बेटी के परस्पर रिश्ते पर मार्मिक रचना पढ़ी। कवि राजेन्द्र प्रसाद पंत ने मिठास भरी जिंदगी के टेढ़े हो जाते रास्तों की तुलना को जलेबी से करते बयां किया’ ज़िन्दगी तू मीठी तो है,पर जलेबी है। कवयित्री उमा जोशी ने रानीखेत के अप्रतिम सौन्दर्य को अपने‌ शब्दों में पिरोते हुए कहा’जग जननी शीतल आंचल‌ में,बसा हुआ सुंदर मुखड़ा है’ वहीं वरिष्ठ -पत्रकार नरेंन्द्र रौतेला ने ग्रामीण जीवन के हालात पर‌ अपनी रचना प्रस्तुति में कहा’मुटठी पर धूप और मुट्ठी भर छांव से लिपटा मेरा गांव’। एडवोकेट दिनेश तिवारी ने बेटियों को मां की सबसे बड़ी ताक़त व ढाल बताते हुए रचना पाठ किया’ पंखुड़ियां गुलाब की बड़ी हो गई, बेटियां ‌‌‌‌‌मां के हक में खड़ी हो गई।’ काव्य गोष्ठी से पूर्व हिंदी की दशा -दिशा पर‌ परिचर्चा भी हुई। काव्य गोष्ठी का संचालन साहित्य कर्मी , वरिष्ठ पत्रकार विमल सती ने किया। कार्यक्रम में नन्दा देवी महोत्सव समिति अध्यक्ष हरीश लाल साह सहयोगी रहे।

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काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ नागरिक कैलाश पांडे, संगीत शिक्षिका मीनाक्षी उप्रेती, छावनी परिषद के स्वच्छता अधीक्षक अजय प्रताप सिंह, स्वच्छता निरीक्षक चंदन, गोपाल राम, ईश्वर सिंह,रेंजर कमल फर्तयाल,मनीष सदभावना ,उमेश चन्द्र जोशी,विजय पांडे, विमला रावत, कमल‌कुमार आदि मौजूद रहे।

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