*नवांकुर* में आज पढे़ं कविता बगौली जोशी की कविता

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🧭 ” वक्त ” 🧭
आज बुरा है शायद !
कल अच्छा आयेगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।
मुश्किलें हैं आयी जरूर, समाधान भी हो जायेगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
आज है पतझड़ तो,
कल नया फूल मुस्काएगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
थम सा गया अपनों के बिना जीवन!
कल हर दिल को फिर मिलवाएगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
उदास से बैठे पंछी भी शाखों में!
कल पत्ता पत्ता भी संग चहचहाएगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
मुस्कुराता है जो आज अकेले में!
कल दोस्तों संग भी खिलखिलाएगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
तकते हैं जो आज सुनसान राहों को!
कल फिर दुनिया की भीड़ में गुम जाएगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
समेट लें हर पल की मुस्काती यादों को,
बीता लम्हा फिर लौट के न आयेगा!
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
आने वाले पल की गणना स्वप्न सा लगता है!
उसे साकार करने का समय तो आयेगा,
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा।।
आस की डोर बंधी है जब जीवन से,
वो विश्वाश तो रंग जरूर लायेगा;
वक्त ही तो है रुक तो न जायेगा ।।

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कविता बगौली जोशी

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