“स्वामी विवेकानंद का शिकागो संदेश”

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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला

भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी को कोलकाता में हुआ था। विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। वैसे तो उनका पूरा जीवन ही युवाओं के लिए प्रेरणा है। एक 25 साल का नौजवान सांसारिक मोह माया छोड़ आध्यात्म और हिंदुत्व के प्रचार प्रसार में जुट गया। संन्यासी बन ईश्वर की खोज में निकले विवेकानंद के जीवन में एक दौर ऐसा आया, जब उन्होंने पूरे विश्व को हिंदुत्व और आध्यात्म का ज्ञान दिया। 11 सितंबर 1893 में अमेरिका में धर्म संसद का आयोजन हुआ था। भारत की ओर से स्वामी स्वामी विवेकानंद शिकागो में हो रहे धर्म सम्मेलन में शामिल हुए। यहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत हिंदी में ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’ के साथ की। उनके भाषण पर आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो पूरे दो मिनट तक तालियों से गूंजता रहा। भारत के इतिहास में यह दिन गर्व और सम्मान की घटना के तौर पर दर्ज हो गया। स्वामी विवेकानंद जी ने 1893 में आज ही के दिन शिकागो में अपने भाषण से समस्त विश्व को भारत की समृद्ध संस्कृति की सुगंध से पल्लवित किया। उनका यह ऐतिहासिक भाषण हर देशवासी विशेषकर युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करने वाला है। आज से 129 साल पहले अमेरिका के शिकागो में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए भाषण से आज भी वहां का वो कम्युनिटी हॉल गुंजायमान है। 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो के कम्युनिटी हॉल में जब एक साधारण परिधान वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत ‘मेरे अमेरिका के बहनों और भाइयों’ से की तो उस धर्म संसद में बैठा हर एक व्यक्ति तालियां बजाने लगा। कई मिनट तक हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गुंजायमान रही। शिकागो के उस धर्म संसद में जैसे ही स्वामी विवेकानंद सबके सम्मुख अपना भाषण देने आए तो लोगों ने बड़े ही साधारण तरीके से उन्हें लिया। किसी को नहीं पता था कि ये साधारण सा दिखने वाला व्यक्ति आज भारत के माथे पर गौरव का तिलक लगाएगा। स्वामी विवेकानंद ने जैसे ही अपने भाषण की पहली लाइन बोली पूरा हॉल तालियों से गूंज गया। स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, ‘अमेरिका के बहनों और भाइयों! आपके इस स्नेहपूर्ण और भव्य स्वागत से मेरा ह्रदय अपार आनंद से भर गया है। मैं आपको दुनिया की प्राचीनतम संत परंपरा की तरफ से धन्यवाद देता हूं। स्वामी विवेकानंद को अमेरिका के शिकागो में होने वाली धर्म संसद में किसी प्रोफेसर की मदद से बोलने के लिए अल्प समय मिला था। सिर्फ 2 मिनट में उन्हें अपने विचार रखने थे, लेकिन जैसे ही स्वामी जी शून्य पर बोलना शुरू किए लोग सुनते रह गए। स्वामी विवेकानंद का वो भाषण आज भी पूरे विश्व में याद किया जाता है। सर्वधर्म सम्मेलन में अंत में दस का घंटा बजा। ईसाई पादरी अनुभव करने लगे कि जगत में ईसाई पंथ सर्वश्रेष्ठ है। इस तथ्य को दुनिया के सामने प्रकट करने का समय आ पहुँचा और वास्तव में इसी भावना से अमेरिका के बड़े धार्मिक नेताओं ने इस महासम्मेलन का आयोजन किया था। परंतु किसी को खबर न थी कि यह घंटा तो सनातन हिन्दू-धर्म की विजय का बज रहा है।शिकागो व्याख्यान में स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में उसको प्रस्तुत किया व स्थापित भी किया। विश्व धर्म सभा में जब सभी पंथ स्वयं को ही श्रेष्ठ सिद्ध करने का प्रयास कर रहे थे, तब स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत का विचार सभी सत्यों को स्वीकार करता है।स्वामीजी ने कहा, “मुझे यह कहते हुए गर्व है कि जिस धर्म का मैं अनुयायी हूँ उसने जगत को उदारता और प्राणी मात्र को अपना समझने की भावना दिखलाई है। इतना ही नहीं हम सब पंथों को सच्चा मानते हैं और हमारे पूर्वजों ने प्राचीन काल में भी प्रत्येक अन्याय पीड़ित को आश्रय दिया है।” इसके बाद उन्होंने हिंदू धर्म की जो सारगर्भित विवेचना की, वह कल्पनातीत थी। उन्होंने यह कहकर सभी श्रोताओं के अंतर्मन को छू लिया कि हिंदू तमाम पंथों को सर्वशक्तिमान की खोज के प्रयास के रूप में देखते हैं। वे जन्म या साहचर्य की दशा से निर्धारित होते हैं, प्रत्येक प्रगति के एक चरण को चिह्नित करते हैं। स्वामीजी द्वारा दिए गए अपने संक्षिप्त भाषण में हिंदू धर्म में निहित विश्वव्यापी एकता के तत्व और उसकी विशालता के परिचय ने पश्चिम के लोगों के मनों में सदियों से भारत के प्रति एक नकारात्मक दृष्टि को बदल कर रख दिया। हिंदुत्व की राष्ट्रीय परिभाषा ही है। इस परिप्रेक्ष्य में समझने पर हमें हमारे विशाल देश की बाह्य विविधता में अंतर्निहित एकात्मता के दर्शन होते हैं। उन्होंने हिंदू समाज को जागृत किया तथा भारत को पुन: एक सबल, सशक्त, सुसंपन्न तथा वैभवशाली बनाने की प्रेरणा दी। दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग उनसे प्रभावित हुए और आज भी उनसे प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। सी राजगोपालाचारी के अनुसार “स्वामी विवेकानंद ने हिन्दू धर्म और भारत की रक्षा की” सुभाष चन्द्र बोस के कहा “विवेकानंद आधुनिक भारत के निर्माता हैं”।  महात्मा गाँधी मानते थे कि विवेकानंद ने उनके देशप्रेम को हजार गुना कर दिया। स्वामी विवेकानंद ने खुद को एक भारत के लिए कीमती और चमकता हीरा साबित किया है। उनके योगदान के लिए उन्हें युगों और पीढ़ियों तक याद किया जाएगा।कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि स्वामी जी आधुनिक भारत के निर्माता थे, तो उसमें भी अतिशयोक्ति नहीं हो सकती। यह इसलिए कि स्वामी जी ने भारतीय स्वतंत्रता हेतु जो माहौल निर्माण किया उस पर अमिट छाप पड़ी। आज के समय में स्वामी जी के मानवतावाद के रास्ते पर चलकर ही भारत एवं विश्व का कल्याण हो सकता है। वे बराबर युवाओं से कहा करते थे कि हमें ऐसे युवकों और युवतियों की जरूरत है जिनके अंदर ब्राह्मणों का तेज तथा क्षत्रियों का वीर्य हो। युवा मित्रों! आज विवेकानंद को जानने व 11 सितंबर 1893 शिकागो में उनके द्वारा दिए गए भाषण को पढ़ने के साथ ही उसे गुनने की भी जरूरत है। स्वामीजी का पूरा जीवन और शिक्षाएं लोगों को उठने और खुद का एक बेहतर रूप गढ़ने का आह्वान करती रही हैं। 1893 का भाषण उनकी समस्त शिक्षाओं का मात्र एक सारांश था | शिकागो का भाषण इस बात की एक झलक है कि स्वामीजी वास्तव में किसके लिए खड़े थे और यह सुनिश्चित करना हम सभी का दायित्व है कि हम भारत के सबसे सम्मानित पुत्रों में से एक स्वामी विवेकानंद की इन शिक्षाओं से लाभान्वित हों।यह भारत है जो हमेशा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (दुनिया एक परिवार है) में विश्वास करता है और दुनिया को सार्वभौमिक भाईचारे की ओर ले जा सकता है और सही मायने में ‘विश्व गुरु’ बन सकता है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाये कि स्वामी जी आधुनिक भारत के निर्माता थे, तो उसमें भी अतिशयोक्ति नहीं हो सकती। यह इसलिए कि स्वामी जी ने भारतीय स्वतंत्रता हेतु जो माहौल निर्माण किया उस पर अमिट छाप पड़ी। 

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