द कैंट बोर्ड कर्मचारी महासंघ ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर छावनी कर्मचारियों के हितों को लेकर की वार्ता

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रानीखेत: द कैंट बोर्ड कर्मचारी महासंघ राष्ट्रीय महामंत्री ईश्वर सिंह टनवाल व उत्तराखंड जोनल सेकेट्री राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें उत्तराखण्ड की समस्त 9 छावनी परिषदों को नगरपालिका व नगर निगम में समायोजित करने की स्थिति में छावनी कर्मचारियों के समक्ष आने वाली कठिनाईयों से‌ अवगत कराया।

कर्मचारी नेताद्वय ने कर्मचारी हितों को लेकर मुख्यमंत्री से सविस्तार वार्ता करते हुए क उन्हें बताया कि छावनियों को खत्म कर नगरपालिकाओं में विलय करने के भारत सरकार के नीतिगत निर्णय का महासंघ की ओर से कोई विरोध नहीं है बशर्ते छावनी कर्मचारियों के हितों और सम्मान की रक्षा का सरकार ख्याल रखें। कर्मचारी नेताओं ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि छावनी के राज्य निकायों में विलय की स्थिति में छावनी कर्मचारियों को दूसरे विभाग चुनने का विकल्प दिया जाए।अधिकांश छावनी कर्मचारी केन्द्रीय सिविल विभाग में जाने को तैयार है ऐसे में जहां से कर्मचारियों का पद एक्वायर्ड है उसको वहीं विभाग दिया जाए। उस विभाग में कर्मचारी की वरिष्ठता और अन्य लाभ यथावत रखे जाएं इतना ही नहीं कर्मचारियों को‌ राज्य सरकार में विलय करने की स्थिति में नियमावली की ज्येष्ठता सूची में रखा जाय। कर्मचारी को विलय किये जाने पर 2 वर्ष का परिवीक्षावधि/नवाभ्यास काल में न रखा जाय और सेवानिवृत्त कर्मचारी को ट्रेज़री से पेंशन दी जाए।

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द कैंट बोर्ड कर्मचारी महासंघ राष्ट्रीय महामंत्री ईश्वर सिंह टनवाल व उत्तराखंड जोनल सेकेट्री राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रक्षा मंत्रालय के साथ राज्य की विनिमय वार्ता में छावनी कर्मचारियों का उपर्युक्त पक्ष रखने की मांग की।

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