हिमाचल प्रदेश की दूसरी छावनी परिषद डलहौजी भी बनने जा रही नगर पालिका, उत्तराखंड सरकार नौ छावनी परिषदों के प्रस्ताव भेजने में भी रही फिसड्डी

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रानीखेत– एक ओर जहां उत्तराखंड सरकार राज्य की नौ छावनी परिषदों को समाप्त कर सिविल एरिया का नगर पालिका में विलय करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने में फिसड्डी साबित हुई है वहीं हिमाचल प्रदेश में योल छावनी के बाद अब डलहौजी छावनी को सिविल क्षेत्र में मिलाने की कवायद शुरू हो गई है। इस बीच रानीखेत छावनी क्षेत्र में नागरिक 254 दिन से इस मांग पर धरनारत हैं।

उत्तराखंड राज्य सरकार के सुस्त रवैये के चलते राज्य की नौ छावनी परिषदों के बाशिंदों की नगर पालिकाओं में जाने की व्यग्रता पर फिलहाल ब्रेक लगा है।राज्य सरकार इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव तक नहीं भेज पाई है वहीं पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की दूसरी छावनी परिषद डलहौजी भी नगर पालिका बनने की तैयारी में है। वहीं हिमाचल प्रदेश की पांच अन्य छावनियां भी औपनिवेशिक कानूनों से मुक्ति के रास्ते पर खडी़ हैं।

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बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने डलहौजी छावनी के सीईओ को एक सप्ताह में छावनी की अधिसूचना रद्द करने और इसकी रिपोर्ट डीजीडीआई को सौंपने के लिए कहा है।

डीडीजी (छावनी) अमित कुमार ने इसकी रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले प्रदेश की योल छावनी को भी सिविल क्षेत्र में मिला दिया गया है। वहीं अगर डलहौजी छावनी को भी सिविल क्षेत्र में मिलाया जाता है तो यह प्रदेश की दूसरी छावनी बनेगी जो छावनी क्षेत्र से बाहर होगी।

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वहीं रक्षा संपदा विभाग के डीडीजी (छावनी) अमित कुमार ने 20 नवंबर को वर्चुअल बैठक आयोजित की। जिसमें प्रधान निदेशक रक्षा संपदा पश्चिमी कमान चंडीगढ को निर्देश दिए कि वह राज्य सरकार से डगशाई, कसौली, बकलोह, जतोग, सुबाथू छावनी क्षेत्र को बाहर करने के लिए संपर्क करें और इसमें तेजी लाएं। इसके बाद अब प्रदेश की अन्य छावनियों के लोगों में भी खुशी की लहर है। जल्द यह छावनियां भी अब सिविल क्षेत्र में मिलाई जा सकती है। उधर छावनी एसोसिएशन के महासचिव मनमोहन शर्मा ने कहा कि प्रदेश की छावनियों के लोगों को अब उम्मीद है कि वह जल्द ही छावनियों से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने राज्य सरकार से इस कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया।

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इधर , उत्तराखंड सरकार की ओर से केंद्र सरकार को छावनी परिषदों की अधिसूचना रद्द कर नगर पालिकाओं व नगर निगम में विलय करने संबंधी प्रस्ताव नौ माह बीतने के बाद भी न भेजे जाने से छावनियों में रह‌ रहे‌ लोगों में असंतोष साफ देखा जा रहा है।