इस चुनाव में भी बाहर निकला जाति प्रमाण पत्र विवाद का जिन्न, सरिता आर्य और राजकुमार विवाद के लपेटे में

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विधानसभा चुनाव में जाति प्रमाण पत्र विवाद का जिन्न एक बार फिर से बाहर निकल आया है। एक ओर जहांनैनीताल से भाजपा प्रत्याशी सरिता आर्य इस विवाद के लपेटे में आईं है तो वहीं राजपुर सीट से कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेदार राजकुमार भी इस बार इस विवाद की आंच में आए हैं।

बता दें की वर्ष 2012 में हेम आर्य ने सरिता के जाति प्रमाण पत्र को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी लेकिन जाति प्रमाण पत्र को सक्षम फोरम में चुनौती देने की छूट प्रदान की थी। लेकिन 2012 में सरिता आर्य के विधायक बनने के बाद यह मामला कुछ सालों के लिए शांत हो गया था लेकिन अब फिर 2022 में भाजपा से सरिता को टिकट मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है। वहीं इस सम्बंध में बीते दिन शुक्रवार को बागजाला निवासी हरीश चंद ने सरिता आर्य के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सरिता आर्य द्वारा गलत सूचना देकर जाति प्रमाण पत्र हासिल किया गया है। उन्होंने कहा था की सरिता आर्य ने आवेदन में पति के साथ अपनी माता जीवंती देवी का नाम अंकित किया है जबकि नियमानुसार उन्हें अपने पिता का नाम अंकित करना चाहिए था। जिस पर तहसीलदार नवाजिश खलीक द्वारा शनिवार को सरिता आर्य को नोटिस जारी करते हुए कहा गया हैं की 24 जनवरी को अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से अपने जाति प्रमाण पत्र से सम्बंधित दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करें ताकि मामले की जांच के बाद उचित फैसला लिया जा सकें।

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राजकुमार

उधर ,देहरादून जिले की राजपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हाईकोर्ट ने उनके जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए राजकुमार के साथ ही सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 18 फरवरी नियत की गई है।

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देहरादून निवासी बालेश बवानिया ने याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि राजकुमार ने 2011 में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर अपना जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया, जो शिकायतकर्ता की जांच के बाद 2012 में निरस्त कर दिया गया। फिर कुछ दिन बाद ही राजकुमार ने फिर से नया जाति प्रमाण पत्र हासिल कर लिया। देहरादून के खुड़बुड़ा मोहल्ला निवासी बालेश बवानिया का कहना है पूर्व विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी को लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने डीएम को शिकायती पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग कर की तो डीएम ने एसडीएम को जांच सौंपी है।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार नियमानुसार राज्य में 1950 से पहले से रह रहे व्यक्ति को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का अधिकार है। यदि आवेदक का परिवार 1950 से पहले दूसरे राज्य में रहता है तो वहीं से प्रमाण पत्र हासिल करने का अधिकारी होगा। यह भी कहा कि डीएम ने जिलाधिकारी को एसडीएम को नहीं बल्कि कमेटी गठित कर जांच करानी चाहिए। न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनएस धानिक की एकलपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए पूर्व विधायक राजकुमार व सरकार से जवाब मांगा है।

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