विधायक करन माहरा ने घोषित चार जिलों के शासनादेश को पुनर्जीवित करने की मांग विधान सभा में उठाई

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रानीखेत : उपनेता सदन एवं रानीखेत क्षेत्र के विधायक करन माहरा ने आज मंगलवार को विधान सभा में भाजपा द्वारा वर्ष 2011 में घोषित चार जिलों के शासनादेश को पुनर्जीवित करने की मांग को पुरजोर ढंग से उठाया । उपनेता सदन ने कहा कि इससे पहले कि आगामी विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो,सरकार को घोषित जिलों के गठन की कार्यवाही कर देनी चाहिए।
विधायक करन माहरा सहित दो अन्य विधायकों ने आज नियम 58 के तहत कार्यस्थगन का प्रस्ताव देकर जिलों के पुनर्गठन पर चर्चा की मांग की थी ।जिसके तहत श्री माहरा ने रानीखेत,यमुनोत्री,कोटद्वार और डीडीहाट जिलों को लेकर 8जून 2011 को तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा जारी किए गए शासनादेश को पुनर्जीवित करने की मांग की।उन्होंने कहा कि पूर्व में भी मंडलायुक्तों ने जिलों का पुनर्गठन कर छोटी प्रशासनिक इकाइयों की सिफारिश की थी।कहा कि काशीपुर ,पुरोला ,खटीमा की जनता भी समय -समय पर जिलों की मांग करती आई है हम उसका भी समर्थन करते हैं।
करन माहरा ने कहा कि क्षेत्र व राज्य के विकास के लिए छोटी प्रशासनिक इकाइयों का होना नितांत जरूरी है,आज भी उत्तरकाशी जिले में पुरोला तहसील,अल्मोडा़ जिले में रानीखेत तहसील,पौडी़ में कोटद्वार और पिथौरागढ़ जिले में डीडीहाट तहसील का भौगोलिक क्षेत्रफल बहुत बडा़ हैं जिसकारण सुदूर क्षेत्रों के लोगों को अपने कार्य केलिए जिला मुख्यालय तक आने-जाने में समय और धन की बर्बादी होती है और जिला मुख्यालय में एक दिन में कार्य न होने से प्रवास करना पड़ता है जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है।इसी कारण लोग छोटी प्रशासनिक इकाइयों की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नए जिलों के गठन से लोगों को प्रशासनिक कार्यों में सुविधा मिलेगी और उनका धन और समय भी बर्बाद नहीं होगा।

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