पहाड़ के विकास का सच:कुर्सी की डोली में गांव से गर्भवती को ला रहे थे अस्पताल,रास्ते में जन्मा बच्चा

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स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी उत्तराखंड के अधिकतर गांव आज भी सड़क पहुंचने की प्रतीक्षा में हैं। सड़क ना होने की वजह से बीमार/प्रसूताओं को अस्पताल तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों की प्रसूताओं और मरीजों को इलाज पाने के लिए काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। सुविधाओं के अभाव में आए दिन ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के पैदल या डोली से मीलों चलकर शहर कस्बों के अस्पताल तक आने और कई के रास्ते में दम तोड़ देने की घटनाएं अकसर खबरों की सुर्खियां बनती रही है।

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ऐसा ही ताजा वाकया सामने आया है जहां गर्भवती को कुर्सी की डोली बनाकर पैदल रास्ते अस्पताल लाया जा रहा था इस बीच उसने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
नैनीताल मुख्यालय से चंद किलोमीटर दूरी पर स्थित भल्यूटी गांव से गर्भवती महिला को कुर्सी में बांधकर ग्रामीण मुख्य मार्ग तक ला रहे थे की इस बीच गर्भवती महिला ने बच्चे को जंगल में ही जन्म दे दिया। जिसके बाद महिला को एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल तक पहुचाया गया।
एनएच 87 में ज्योलिकोट भुजियाघाट से लगभग 5 किलोमीटर दूर पैदल मार्ग में भल्यूटी गांव बसा है। यहां सड़क नहीं होने के कारण बेशुमार समस्याएं हैं। बुधवार शाम यहां एक गर्भवती महिला को अचानक दर्द उठने के बाद ग्रामीण उसे कुर्सी में बांधकर सड़क तक ला रहे थे की अचानक महिला ने रास्ते में ही बच्चे को जन्म दे दिया। महिला को जैसे तैसे सड़क पर खड़ी चढ़ाई से मुख्य मार्ग तक लाया गया। और एम्बुलेंस के माध्यम से जच्चा बच्चा को अस्पताल तक ले जाया गया। जहां पर दोनों स्वस्थ्य बताए जा रहें है।
इस क्षेत्र की पंचायत सदस्य मुन्नी जीना, कुंदन सिंह जीना और पूर्व जिला पंचायत सदस संजय शाह ने बताया की गांव में ऐसा तो आए दिन होता रहता है । कई लोगों को समय पर उपचार नहीं मिलने से मौत भी हो जाती है । जिस ग्रामीणों ने जल्द क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र खोलने की मांग की है।

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