रानीखेत में आशा हेल्थ वर्कर्स का प्रदर्शन: न्यूनतम वेतन और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग, सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

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​रानीखेत:उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा हेल्थ वर्कर्स ने अब अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर बड़े पैमाने पर मोर्चा खोल दिया है। ‘उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन’ (ऐक्टू से संबद्ध) के आह्वान पर आज द्वाराहाट इकाई के बैनर तले क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

​प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को जोर-शोर से उठाया। आशा वर्कर्स का स्पष्ट कहना है कि उन्हें केवल मामूली प्रोत्साहन राशि या वाउचर पर न रखकर, न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए और उन्हें राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। पूर्व के उग्र प्रदर्शनों के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा “3000 में दम नहीं, 26000 से कम नहीं” के नारे के साथ न्यूनतम ₹26,000 मासिक वेतन की मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा चुकी है।

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​इसके साथ ही, सेवाकाल समाप्त होने के बाद सामाजिक सुरक्षा के रूप में पेंशन देने की मांग लगातार की जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक स्थायी पेंशन नीति लागू नहीं होती, तब तक सेवानिवृत्त होने वाली हर आशा कार्यकर्ता को कम से कम ₹10 लाख की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। इसके अलावा, फिक्स मासिक मानदेय को तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर ₹11,500 किए जाने की मांग भी इसमें शामिल है।

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​राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत मिलने वाले बजट को बढ़ाने की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि विभिन्न स्वास्थ्य सर्वे, पल्स पोलियो और अन्य अभियानों के एवज में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर होना चाहिए। कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि अक्सर बजट की कमी का हवाला देकर उनका भुगतान रोक दिया जाता है। साथ ही, सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को भरने के साथ-साथ, वहां ड्यूटी के सिलसिले में आने वाली आशा कार्यकर्ताओं के बैठने और विश्राम के लिए उचित ‘आशा घर’ का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।

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​प्रदर्शन के अंत में चेतावनी देते हुए यूनियन ने स्पष्ट किया कि आज 24 अक्टूबर को आयोजित जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शनों के बाद भी यदि धामी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगी। इसके तहत 22 नवंबर 2026 को प्रदेशभर की हजारों आशा कार्यकर्ता राजधानी देहरादून में एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करते हुए कूच करेंगी। यदि इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन तालाबंदी शुरू कर दी जाएगी।

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