रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार व पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली के संस्थापक स्व. मोहन उप्रेती के शताब्दी वर्ष पर आयोजित होंगे अनेक कार्यक्रम
सी एम पपनै
नई दिल्ली। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर सु-विख्यात सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली के संस्थापक, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) संगीत विधा के एसोसिएट प्रोफेसर एवं कार्यकारी निदेशक तथा भारतीय व अंतरराष्ट्रीय रंगमंच पर मंचित अनेक सुप्रसिद्ध नाटकों व गीत-नाट्यों को यादगार संगीत से संजोने वाले व लोकगायन तथा लोकसंगीत विधा के क्षेत्र में अनेक उच्च सम्मानों से सम्मानित तथा देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू द्वारा ‘बेडू पाको बॉय’ नाम से संबोधित किए गए स्व. मोहन उप्रेती के शताब्दी वर्ष पर पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली द्वारा उत्तराखंड के कुमाऊं व गढ़वाल अंचल सहित दिल्ली महानगर में गीत-संगीत व वाद्ययंत्रों के वादन से जुड़े अनेक कार्यक्रमों का मंचन तथा संगोष्ठियों का आयोजन किया जायेगा।
रंगमंच जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार रहे स्व. मोहन उप्रेती के शताब्दी वर्ष पर पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली द्वारा आयोजित किए जा रहे भव्य कार्यक्रमों का श्रीगणेश 17 फरवरी 2027 को दिल्ली में आंचलिक व राष्ट्रीय फलक पर विभिन्न कला विधाओं से जुड़ी रही जानीमानी हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित किया जायेगा।
वर्ष 1968 में सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था पर्वतीय कला केंद्र की स्थापना स्व. मोहन उप्रेती के सानिध्य में ही की गई थी। देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा वर्ष 1969 में उक्त संस्था का विधिवत उद्घाटन किया गया था। वर्ष 1976 में तत्कालीन राष्ट्रपति माननीय फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा उक्त संस्था के कार्यक्रम में उपस्थित होकर तथा वर्ष 1977 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के भारत आगमन स्वागत समारोह में उक्त संस्था के गीत-संगीत के कार्यक्रम स्व. मोहन उप्रेती के सानिध्य में मंचित हुए थे। वर्ष 1970 एवं 1983 तथा वर्ष 1988 में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद भारत सरकार द्वारा पर्वतीय कला केंद्र के कलाकारों को स्व. मोहन उप्रेती के नेतृत्व व निर्देशन में विश्व के अनेकों देशों में भारत की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मंचन हेतु उत्तरदायित्व सौंपा गया था। स्व. मोहन उप्रेती ने विश्व के करीब बाईस देशों में गीत-संगीत व लोकगाथाओं से जुड़े दर्जनों कार्यक्रम मंचित कर उत्तराखंड व देश का गौरव बढ़ाया था, उक्त देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने में योगदान दिया था।
पर्वतीय कला केंद्र के कलाकारों द्वारा स्व. मोहन उप्रेती के संगीत निर्देशन व प्रस्तुतीकरण में उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल अंचल की बोली-भाषा व लोक संगीत की धुनों में उत्तराखंड के लोकगीत और नृत्य तथा सुप्रसिद्ध लोकगाथाओं राजुला मालूशाही, गंगनाथ, अजुवा बफौल, जीतू बग्ड़वाल, भाना गंगनाथ, रसिक रमौल, गढ़वाल की पांडव जागर शैली पर आधारित-महाभारत, हिल-जात्रा, हरु-हीत, रामी, लोक देवता तथा गोरीधना के साथ-साथ अन्य गीत नाट्यों में उत्तराखंड गायन शैली की रामलीला, अनेकता में एकता, गंगा-अवतरण एवं उदगम, लाल गुलाब, बसंती सांझ, स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित- वन्देमांतम, नौबत ऑफ कुमाऊं, देशभक्ति गीत, इंद्रसभा, मध्य हिमालय क्षेत्र की लोककथाएं, मेघदूत, सांझी विरासत, अमीर खुसरो इत्यादि इत्यादि गीत नाट्यों का हिंदी, संस्कृत और उर्दू बोली- भाषा में यादगार मंचन दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों में किया था। मंचित अनेकों गीत नाट्य अंतर्राष्ट्रीय भारत रंग महोत्सव व अन्य राष्ट्रीय महोत्सवों के साथ-साथ विश्व के अनेकों देशों व रंगमंच जगत से जुड़े विश्व के सबसे बड़े ओलंपिक थियेटर में मंचित किए गए।
पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली द्वारा स्व. मोहन उप्रेती का शताब्दी वर्ष आगामी वर्ष 2027 माह फरवरी 17 से दिल्ली से शुभारंभ किया जाएगा। आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों के क्रम में अल्मोड़ा में मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला एवं विज्ञान शोध समिति अध्यक्ष हेमंत जोशी, रानीखेत में सुप्रसिद्ध संस्कृति कर्मी विमल सती, नैनीताल में जहूर आलम तथा देहरादून में हीरामणि ग्रुप अध्यक्षा श्रीमती राखी रावत (नीति माणा घाटी) व अंचल के अन्य शहरों में स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के सहयोग तथा दिल्ली में उक्त संस्था से जुड़े रहे पदाधिकारियों व कलाकारों के साथ-साथ उत्तराखंड की विभूतियों में प्रमुख टी सी उप्रेती, संजय जोशी, नरेंद्र लडवाल, सुरेश पांडे, पी सी नैनवाल, रतन सिंह रावत, शेखर पाठक, सतीश टम्टा, रमा उप्रेती, दुर्गा सिंह भंडारी, पूरन चंद्र नैलवाल, डॉ. हरि सुमन बिष्ट, गणेश दत्त गौड़, मदन मोहन सती, दिवान सिंह बजेली इत्यादि इत्यादि के सहयोग से शताब्दी वर्ष के भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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