उत्तराखंड में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान की शुरुआत: रानीखेत में चौबटिया उद्यान और निरीक्षण भवन की जमीन के मुद्दे पर गरजे करन माहरा
रानीखेत: उत्तराखंड कांग्रेस ने धामी सरकार पर सरकारी जमीनों और सार्वजनिक संपत्तियों की कथित बंदरबांट का आरोप लगाते हुए 4 नवंबर को राज्यव्यापी ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ आंदोलन का आगाज किया। इस अभियान के तहत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता करन माहरा ने रानीखेत में मोर्चा संभालते हुए प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है।
रानीखेत क्षेत्र में अभियान का नेतृत्व कर रहे करन माहरा ने ऐतिहासिक चौबटिया उद्यान पार्क और निरीक्षण भवन (Inspection Bungalow) की बहुमूल्य जमीनों को निजी हाथों में सौंपने और प्रबंधन के नाम पर दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों को कौड़ियों के भाव निजी क्षेत्र को सौंपने का काम कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष ने राज्य भर में लगभग 7,000 बीघा सरकारी जमीन के हस्तांतरण पर सवाल खड़े किए । उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर इस विशाल भू-भाग को या तो निजी संस्थाओं को लीज पर दे दिया गया है या फिर अवैध तरीके से उनके सुपुर्द कर दिया गया है। माहरा के अनुसार, यह केवल नीतिगत फैसला नहीं बल्कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और परिसंपत्तियों का सुनियोजित दोहन है।
कहा कि सबसे बड़ा आरोप मसूरी स्थित ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की जमीन से जुड़ा है। पर्यटन विकास परियोजना के नाम पर हुए इस आवंटन को माहरा ने प्रदेश का “सबसे बड़ा घोटाला” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि हजारों करोड़ रुपये मूल्य की इस ऐतिहासिक जमीन को बेहद मामूली सालाना लीज दर पर योगगुरु रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण से जुड़ी कंपनी को सौंप दिया गया। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा ऋषिकेश आईडीपीएल परिसर की भूमि , हल्द्वानी में एच एम टी रानीबाग,आईएमपीसीएल मोहान का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। बताया कि आंदोलन केवल रानीखेत तक सीमित नहीं है। ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान के तहत प्रदेश भर के 11 प्रमुख स्थानों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओ के नेतृत्व में आज से विरोध प्रदर्शन शुरू हो रहा है।कहा कि यदि सरकार ने राज्य की सार्वजनिक संपत्तियों और जमीनों के हस्तांतरण पर रोक नहीं लगाई, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
इस दौरान पीसीसी सदस्य कैलाश पांडे, गोपाल सिंह देव, दीप उपाध्याय, प्रमोद पाल आदि अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।




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