ऊणी महादेव–नौघर मोटर मार्ग मौजूदा बरसात में धंसाव और दरकने से बना दहशत का पर्याय

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रानीखेत – ताड़ीखेत विकास खंड अंतर्गत ऊणी महादेव–नौघर मोटर मार्ग ने अपनी पहली बरसात में ही बारिश के आगे घुटने टेक दिए हैं। यह सड़क कहीं बह रही है, कहीं धंस रही है, कहीं पहाड़ टूटकर घरों की ओर आने को आमादा है, तो कहीं घरों की ज़मीन दरक रही है। ऐसा मंजर देख कर सहज ही अंदाजा लग जाता है कि अनियोजित विकास किस तरह प्रकृति जन्य तबाही ला सकता है।

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इस सड़क का निर्माण क्षेत्र के बाशिंदों के लिए सुविधा से अधिक तबाही की दहशत लेकर आया है। मौजूदा बरसात ने इस सड़क निर्माण में बरती लापरवाही और विकास जन्य कुप्रबंध की पोल खोलकर रख दी है। बरसात में बहती ,दरकती इस सड़क ने की सवाल खड़े किए हैं कि आखिर क्या सड़क बनाने से पहले भूगर्भीय जांच हुई थी?अगर हुई थी, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?क्या ढलान की स्थिरता, जल निकासी और रिटेनिंग संरचनाओं का वैज्ञानिक आकलन किया गया था?या फिर फाइलों में सब कुछ “मानक के अनुसार” लिखकर काम पूरा मान लिया गया? क्षेत्रीय जनता का कहना है कि अगर जांच हुई थी, तो रिपोर्ट जनता के सामने रखी जानी चाहिए। अगर नहीं हुई , तो फिर यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। क्षेत्रीय जनता जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल कर रही है कि क्या यही विकास है,जिसका ढिंढोरा वे पीटते हैं? जो विनाश की पीड़ा बनकर उनकी दहलीज तक पहुंच गया है।

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