नालियों में बजबजाती गंदगी,बहता मल, छावनी परिषद के पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के औपचारिक अभियान की खोल रहे पोल
रानीखेत – एक ओर छावनी परिषद प्लास्टिक मुक्त छावनी के नारे के साथ कभी डस्टबिन तो कभी जूट बैग
का वितरण कर रही है और विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून तक अभियान जारी रखने का ऐलान कर चुकी है वहीं छावनी परिषद की नाक के नीचे मुहल्ले की नालियों में बजबजाती गंदगी उसके पर्यावरण को लेकर औपचारिक अभियान की कहानी खुद बयां कर रही है।
दरअसल छावनी परिषद के पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर चलाए जाने वाले अभियान बैनर -नारों तक ही सीमित रहे हैं जबकि स्वच्छता की पोल कचरे कूड़े और मल से बजबजा रही नालियां स्वयं खोल रही हैं नगर के बीच से होकर गुजरने वाले नाले जहां गंदगी से चोक हो गए हैं। अगर समय रहते नाले नालियों की सफाई नहीं हुई तो नगर के निचले इलाकों आनेवाली बरसात में नालियों का पानी सड़कों पर बहने के हालात बन जाएंगे। इतना ही नहीं सुदामा पुरी में (पुरानी तीन टंकी)के पास गंदगी के साथ ही खुले में मल बहने से बदबू के कारण स्थानीय लोगों का जीना मुहाल है। इसे लेकर स्थानीय नागरिक कई बार छावनी परिषद में शिकायत कर चुके हैं।गंदगी के कारण हरबार की तरह मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ने के आसार हैं। नागरिकों का कहना है मुख्य बाजारों में डस्टबिन व थैले बांट कर फोटो सेशन कराकर आत्ममुग्ध होने वाली छावनी परिषद को मुहल्लों की सफाई व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि तय बारिश के सीजन से पहले नालों की सफाई हो जाए और नगर की नालियों की तलीझाड़़ सफाई की जाए।
नागरिकों का कहना है कि पर्यावरण तभी बचेगा जब नगर की आबोहवा को स्वच्छ रखा जा सकेगा। केवल पर्यावरण संरक्षण के नाम पर फोटो खिंचवाने और अखबारी कतरनें जमा करने से कुछ हासिल नहीं होगा।








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