रानीखेत महाविद्यालय को मिली स्वायत्तता की सौगात, बीबीए-बीसीए पाठ्यक्रमों सहित उच्च शिक्षा मंत्री ने की अनेक विकास योजनाओं की घोषणा
रानीखेत, 12 जून। उत्तराखण्ड सरकार के उच्च शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गुरुवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत का भ्रमण कर नव-निर्मित वाणिज्य संकाय भवन एवं कला संकाय भवन का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने महाविद्यालय को स्वायत्त (ऑटोनॉमस) महाविद्यालय के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा करते हुए अनेक महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का ऐलान किया।
अपने संबोधन में डॉ. रावत ने कहा कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत ने शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों, अनुशासन तथा आधारभूत संरचना के विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। संस्थान ने स्वायत्तता के लिए आवश्यक मानकों एवं क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जिसके आधार पर इसे स्वायत्त महाविद्यालय बनाए जाने की दिशा में सकारात्मक कार्यवाही की जाएगी।
विद्यार्थियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मंत्री ने महाविद्यालय में बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) तथा बीसीए (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन्स) पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बदलते समय में प्रबंधन एवं सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करेगी।
डॉ. रावत ने कंप्यूटर शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए महाविद्यालय को 50 अतिरिक्त कंप्यूटर उपलब्ध कराने तथा कंप्यूटर प्रयोगशाला को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किए जाने का आश्वासन दिया। साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनारों तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन को ध्यान में रखते हुए 200 गद्दीदार कुर्सियों सहित एक आधुनिक कॉन्फ्रेंस कक्ष की स्थापना की घोषणा भी की।
महाविद्यालय परिसर के नव-निर्मित भवनों तथा पुराने परिसर के बीच सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए मंत्री ने 40 लाख रुपये की लागत से संपर्क मार्ग निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत संरचना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है और राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. बर्खा रौतेला द्वारा तैयार किए गए विस्तृत विकास परियोजना प्रतिवेदन की मंत्री ने विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने इसे संस्थान की दूरदर्शी सोच एवं विकासोन्मुख दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाबद्ध पहलें ही किसी संस्थान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती हैं। उन्होंने महाविद्यालय की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर आधारित एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) तैयार करने का सुझाव भी दिया।
अपने संबोधन में डॉ. रावत ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित होना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, तकनीकी दक्षता और नैतिक मूल्यों के समन्वय के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर पुष्पेश पाण्डेय ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए संस्थान की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध गतिविधियों, राष्ट्रीय मूल्यांकन तथा भावी योजनाओं का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने महाविद्यालय के विकास में सहयोग प्रदान करने के लिए राज्य सरकार एवं उच्च शिक्षा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पारूल भारद्वाज एवं डॉ. पी.एम. तिवारी ने किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक प्रमोद नैनवाल, ब्लॉक प्रमुख, विभिन्न जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, नगर के गणमान्य नागरिक, महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के उपरांत विधायक प्रमोद नैनवाल ने महाविद्यालय की विकास यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान पर्वतीय क्षेत्र में उच्च शिक्षा का एक उत्कृष्ट केंद्र बन चुका है। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री से महाविद्यालय को और अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। अन्य जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने भी मंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र की उच्च शिक्षा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
महाविद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वायत्तता की पहल, नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की स्थापना, डिजिटल संसाधनों के विस्तार तथा आधारभूत संरचना के विकास से संस्थान भविष्य में प्रदेश के अग्रणी उच्च शिक्षा संस्थानों में अपना स्थान और अधिक सुदृढ़ करेगा।




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