कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक किरौला ने धामी सरकार पर बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया

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रानीखेत -कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक किरौला ने उत्तराखंड सरकार पर सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखंड की सार्वजनिक संपत्तियों को लीज और पीपीपी मॉडल के माध्यम से चुनिंदा निजी कंपनियों को देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

किरौला ने कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) के माध्यम से सरकारी भूमि को निवेश परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस ने हाल में आरोप लगाया था कि करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि को लंबे समय की लीज पर देने की तैयारी है। हालांकि, राज्य सरकार ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा है कि UIIDB के पास फिलहाल 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध है और 90 वर्ष की लीज की बात भी गलत है।

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जिलाध्यक्ष ने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट का उदाहरण देते हुए कहा कि लगभग 142 एकड़ भूमि और वहां विकसित पर्यटन सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए निजी संचालक को दिए जाने का मामला सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश में भी 142 एकड़ भूमि के सफल बोलीदाता को दिए जाने का उल्लेख है।

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दीपक किरौला ने कहा कि सरकारी जमीन और संपत्ति जनता की धरोहर है। इसलिए इनके लीज, हस्तांतरण अथवा पीपीपी मॉडल पर दिए जाने की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, उचित मूल्यांकन और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाएगी और सरकारी संपत्तियों से जुड़े सभी निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य की बेशकीमती जमीनों के संबंध में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-सी भूमि, किस संस्था को, कितनी अवधि और किन शर्तों पर दी जा रही है।

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