भतरौंजखान में चतुर्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ भंडारे के साथ सम्पन्न

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सी एम पपनै

भतरौंजखान– स्वामी हीरानंद बाबा मंदिर में विगत 2 सितंबर से 9 सितंबर तक आयोजित चतुर्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ भंडारे के साथ संपन्न हुआ।

आयोजन में प्रसिद्ध व्यास नंदा बल्लभ पंत ने कथा वाचन किया जबकि श्रीमती जानकी देवी पत्नी गोपाल सिंह असवाल मुख्य यजमान की भूमिका में रहे।श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के इस अवसर पर 2 सितंबर को स्थानीय ग्रामीण महिलाओं द्वारा कलश यात्रा, 4 सितंबर जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण की झांकी व 6 सितंबर को स्थानीय बाजार में धूमधाम के साथ डोला उठाया गया। प्रति दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालुओं द्वारा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ व कीर्तनों में शामिल होकर तथा कथा समाप्ति पर पंचामृत व प्रसाद ग्रहण किया गया। बुधवार अंतिम दिवस इर्द-गिर्द बसे दर्जनों गांवों के श्रद्धालु भक्तों व स्थानीय स्कूलों बच्चों द्वारा बड़ी संख्या में मंदिर परिसर भंडारे में पहुंच प्रसाद ग्रहण किया।

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मंदिर समिति अध्यक्ष पूरन करगेती, संरक्षक व स्थानीय व्यापार संघ अध्यक्ष प्रदीप पंत, उपाध्यक्ष हरीश भट्ट तथा कोषाध्यक्ष डॉ रघुवीर पंत की प्रभावी सोच तथा सहयोग, स्थानीय व्यापार संघ व इर्दगिर्द के दर्जनों गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं व प्रबुद्धजनों में प्रमुख महेंद्र पाल सिंह बिष्ट, देवेंद्र छिम्वाल, भगवत वर्मा, जगदीश शर्मा, हरीश खुल्बे, बिष्णु दत्त पंत, गोपाल नैनवाल इत्यादि इत्यादि की अपार श्रद्धा से अति वर्षा बरसने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में पहुंचे श्रद्धालुओं की उपस्थित में सात दिनी आयोजन कथा, हवन, आरती प्रसाद वितरण व भव्य भंडारा आयोजन के साथ संपन्न हुआ।

इससे पूर्व कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा भागवत कथा वाचन के दौरान श्रद्धालुओं को बताया कि, भागवत कथा का आयोजन कराने से घर व क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा आती है, पितरों को शांति व सद्गति मिलती है तथा परिवार व समाज के लोगों में सौहार्द बढ़ता है। नई पीढ़ी को धार्मिक परंपराओं, संयम, और सत्कर्मों की प्रेरणा मिलती है। जन्म-जन्मांतर के पापों और नकारात्मकता मिटती है। मानसिक शांति और परिवार में सुख-समृद्धि:, घर-परिवार में आ रही अशांति, रोग, शोक, दरिद्रता और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए भागवत कथा कराई जाती है। साथ ही धर्म और अध्यात्म का प्रसार: समाज में धार्मिकता, सदाचार, ज्ञान और वैराग्य की भावना का विकास होता है।

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मंदिर समिति अध्यक्ष पूरन करगेती, उपाध्यक्ष हरीश भट्ट, संरक्षक प्रदीप पंत व कोषाध्यक्ष रघुवीर पंत द्वारा चतुर्थ भागवत कथा कराने के मुख्य उद्देश्य अंचल व स्थानीय ग्रामीण क्षेत्र की सुख शांति व लोगों के आत्मज्ञान की वृद्धि बताया गया। आयोजन को भव्य और सफल बनाने हेतु सभी दानदाताओं, सहयोगियों व श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में दूर-दूर से पहुंचे सभी साधु संतों की उपस्थिति के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।

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उपाध्यक्ष हरीश भट्ट तथा कोषाध्यक्ष, महेंद्र पाल सिंह बिष्ट, देवेंद्र छिम्वाल, भगवत वर्मा, जगदीश शर्मा, हरीश खुल्बे, बिष्णु दत्त पंत, गोपाल नैनवाल ने आयोजन में भरपूर सहयोग किया। भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा प्रस्तुत कर्णप्रिय गायन में जगदीश चंद्र पंत द्वारा ऑर्गन, मयंक उपाध्याय द्वारा पैड, शंकर दत्त जोशी द्वारा तबला तथा दिनेश, विशंभर दत्त जोशी व पीताम्बर दत्त जोशी द्वारा गायन में प्रभावी व प्रभावशाली संगत की गई।


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