अल्मोड़ा की बेटी श्रीपूर्णा ने फ्रांस के और्हेल्यै संग लिए सात फेरे, कसार देवी बना दो संस्कृतियों के मिलन का साक्षी


अल्मोड़ा –चीनाखान निवासी श्रीपूर्णा जोशी ने फ्रांस के और्हेल्यै गुरेलिएन के साथ पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया।गुरुवार को कसारदेवी क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित यह भव्य समारोह भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के खूबसूरत संगम का साक्षी बना।
विवाह पूरी तरह हिंदू परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। वर-वधू ने मंडप में अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया। और्हेल्यै ने पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर सभी का दिल जीत लिया, जबकि श्रीपूर्णा पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा में बेहद खूबसूरत नजर आईं।
विदेश से आए मेहमान भी भारतीय संस्कृति के रंग में रंगे दिखाई दिए। कई मेहमानों ने पहली बार इस तरह के वैदिक मंत्रोच्चारऔर सात फेरों की रस्म को इतने करीब से देखा। सभी ने इसे आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव बताया।
कसार देवी क्षेत्र अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां की शांत वादियां और हिमालय की गोद में बसा वातावरण इस अंतरराष्ट्रीय विवाह के लिए एकदम उपयुक्त रहा।
स्थानीय लोगों ने भी इस विवाह को उत्साह के साथ देखा और नवदंपति को आशीर्वाद दिया। कई लोगों ने कहा कि यह शादी न सिर्फ दो व्यक्तियों का मिलन है, बल्कि दो देशों और संस्कृतियों का भी संगम है।
इस विवाह में भारतीय और फ्रांसीसी परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। जहां एक ओर वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे हुए, वहीं दूसरी ओर फ्रांस से आए मेहमानों ने अपने अंदाज में खुशी जाहिर की। समारोह में भारतीय व्यंजनों के साथ-साथ कुछ विदेशी पकवान भी परोसे गए।
यह विवाह इस बात का प्रतीक बना कि जब दिल मिलते हैं, तो दूरियां मायने नहीं रखतीं। भाषा अलग हो सकती है, पर भावनाएं एक जैसी होती हैं
श्रीपूर्णा के परिवार में इस खास मौके पर खुशी का माहौल रहा। वहीं और्हेल्यै के परिजन भी इस पारंपरिक विवाह से बेहद प्रभावित दिखे। दोनों परिवारों ने एक-दूसरे की संस्कृति को अपनाते हुए इस रिश्ते को मजबूती दी।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पहाड़ की वादियों में ऐसा अंतरराष्ट्रीय विवाह विरले ही देखने को मिलता है। यह शादी आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
अल्मोड़ा की यह शादी इस बात की मिसाल है कि सच्चा प्रेम हर सीमा से परे होता है। जब दो दिल एक-दूसरे को अपनाने का फैसला कर लेते हैं, तो देश और दूरी उनके रास्ते की रुकावट नहीं बनते।
कसार देवी की पावन धरती पर संपन्न यह विवाह आने वाले समय में भी भारतीय संस्कृति की समृद्धता और उसकी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बनकर याद किया जाएगा।

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