मिशन 2027को लेकर भाजपा का आंतरिक सर्वे शुरू, विधायकों का सर्वे के आधार पर होगा मूल्यांकन
उत्तराखंड में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने की हैट्रिक के लिए कमजोर कड़ियों को तलाशने निकली है।ऐसे में पार्टी ने राज्यभर में अपने विधायकों के कामकाज का आंतरिक सर्वे शुरू किया है. इस सर्वे को आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
ध्यातव्य है कि भाजपा चुनाव में जीत के लिए पहले भी सर्वे कराकर टिकट काटती रही है।2017में पार्टी ने दो विधायकों के टिकट काटे थे वहीं 2022में 11विधायकों को मैदान से बाहर किया.इसबार माना जा रहा है कि करीब 20विधायकों को पार्टी टिकट से वंचित कर सकती है।
पार्टी की ओर से यह सर्वे तीन चरणों में कराया जा रहा है. सर्वे के दौरान विधायकों की अपने निर्वाचन क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच उनकी उपलब्धता, सरकार की योजनाओं का लाभ कितनी प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचा, स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ उनका तालमेल तथा दोबारा चुनाव जीतने की क्षमता जैसे बिंदुओं पर फीडबैक लिया जा रहा है.
सर्वे में आम जनता के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठन की राय को भी अहम माना जा रहा है. संकेत साफ हैं कि जिन विधायकों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उनका टिकट कट सकता है.
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पिछले एक दशक में पार्टी ने उत्तराखंड में लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है. लोकसभा चुनावों में सभी सीटों पर जीत, विधानसभा चुनावों में बहुमत और हालिया निकाय व पंचायत चुनावों में मिली सफलता ने पार्टी की स्थिति को मजबूत किया है. इसके बावजूद पार्टी किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है और समय रहते कमजोर कड़ियों को चिन्हित करना चाहती है.
सूत्रों के मुताबिक, सर्वे में जिन विधायकों को ‘रेड जोन’ में रखा जाएगा, उन पर विशेष नजर रहेगी. ऐसे विधायक जिनके खिलाफ क्षेत्र में नाराजगी, निष्क्रियता या संगठन से दूरी की शिकायतें मिल रही हैं, उनके टिकट पर पुनर्विचार किया जा सकता है. पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि अब सिर्फ पद या वरिष्ठता के आधार पर टिकट नहीं मिलेगा, बल्कि प्रदर्शन ही मुख्य पैमाना होगा. सूत्र यह भी बताते हैं कि पुरौला , गंगोत्री ,टिहरी , रूद्र प्रयाग, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, यम्केश्वर पौड़ी, कोटद्वार, डीडीहाट, गंगोलीहाट,कपकोट, बागेश्वर, सल्ट , रानीखेत, रामनगर, नैनीताल, कालाढूंगी पहले चरण में रेड जोन में बताए जा रहे हैं हालांकि अभी दो सर्वे और होने हैं।
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि चुनावी सर्वे पूरी तरह संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति का हिस्सा है. जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं से समन्वय और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने की क्षमता को प्राथमिकता दी जा रही है. आने वाले समय में टिकट वितरण में यही सर्वे अहम भूमिका निभाएगा.
कुल मिलाकर, मिशन 2027 के तहत भाजपा ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड में चुनावी सफलता को बरकरार रखने के लिए अपने ही विधायकों की कड़ी परीक्षा ली जाएगी. यह प्रक्रिया जहां संगठन को मजबूत करेगी, वहीं विधायकों पर भी जनता के बीच बेहतर काम करने का दबाव बढ़ाएगी.

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