राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत में “उत्तराखंड के गाँधी” इंद्रमणि बडोनी की जयंती पर स्मृति सत्र आयोजित

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युवाओं में पर्वतीय अस्मिता एवं लोकतांत्रिक चेतना के प्रति जागरूकता पर बल

रानीखेत -उत्तराखंड की पर्वतीय अस्मिता, भाषा–संस्कृति तथा सामाजिक अधिकारों के लिए आजीवन संघर्षरत एवं “उत्तराखंड के गाँधी” के रूप में प्रतिष्ठित महान जननेता इंद्रमणि बडोनी (जन्म: 24 दिसंबर 1925) की 100 वी जयंती के अवसर पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में एक गरिमामय स्मृति सत्र का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उत्तराखंड राज्य आंदोलन की लोकतांत्रिक विरासत, अहिंसक संघर्ष और सामाजिक चेतना से जोड़ना रहा। महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इंद्रमणि बडोनी का जीवन उत्तराखंड के जनांदोलनों, सांस्कृतिक स्वाभिमान और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रेरक प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे बडोनी के विचारों को आत्मसात कर समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझें।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, इतिहास विभाग के वरिष्ठ विद्वान डॉ. महिराज माहरा ने अपने उद्बोधन में इंद्रमणि बडोनी के जीवन-संघर्ष, उनके वैचारिक योगदान तथा उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बडोनी जी का संघर्ष केवल राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों की रक्षा का भी संघर्ष था। उनके द्वारा अपनाया गया अहिंसक एवं लोकतांत्रिक मार्ग आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।डॉ. मेहरा ने यह भी उल्लेख किया कि इंद्रमणि बडोनी ने स्थानीय भाषा, संस्कृति और जनसरोकारों को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का कार्य किया। उनका जीवन और विचार युवाओं के लिए लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की सशक्त प्रेरणा प्रस्तुत करते हैं।

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कार्यक्रम में एन.एस.एस., एन.सी.सी., रोवर–रेंजर तथा रेड क्रॉस इकाइयों के सभी कार्यक्रम अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति रही। इन इकाइयों से जुड़े छात्र–छात्राओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर कार्यक्रम को जीवंत बनाया। विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी ने स्मृति सत्र को विशेष रूप से सार्थक एवं प्रभावशाली बनाया।

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कार्यक्रम के समापन अवसर पर संयोजक डॉ. पारुल भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि इंद्रमणि बडोनी के विचार आज भी उत्तराखंड के सामाजिक–आर्थिक विकास, पर्वतीय क्षेत्रों के सशक्तिकरण तथा लोकतांत्रिक चेतना के संवर्धन के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बडोनी जी के आदर्शों को व्यवहार में अपनाकर समाज और राज्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

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