आर्मी पब्लिक स्कूल ने आयोजित किया उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को समर्पित कार्यक्रम ‘रूट्स एंड रिदम’

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रानीखेत -आर्मी पब्लिक स्कूल, रानीखेत के तत्वावधान में आर्मी के दीवान सिंह हॉल, रानीखेत में उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को समर्पित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रूट्स एंड रिदम – अपणि संस्कृति, अपणि पहचान’ का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पहाड़पन फाउंडेशन, की ओर से प्रस्तुत किया गया, कार्यक्रम का आयोजन आर्मी पब्लिक स्कूल, रानीखेत द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की लोकभाषा, लोकगीत, लोकवाद्य, लोकनृत्य और पारंपरिक संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ना तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पहचान के प्रति गौरव की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की विविध छटाएँ गीत, संगीत, कविता और लोकनृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की गईं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कर्नल मोहित वर्मा डिप्टी कमांडेंट कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर, रानीखेत रहे। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल गुरप्रीत सिंह, शिक्षा अधिकारी कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर, विभिन्न स्थानीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य, गणमान्य अतिथि, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
आर्मी पब्लिक स्कूल, रानीखेत के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद पहाड़पन फाउंडेशन की ओर से आमंत्रित कलाकारों ने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में पहाड़पन फाउंडेशन की संस्थापक कुसुम लता बौराई, आर्मी पब्लिक स्कूल, रानीखेत की पूर्व छात्रा ने पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने जुड़ाव को एक सार्थक मिशन का रूप देते हुए पहाड़पन फाउंडेशन की स्थापना की। फाउंडेशन संस्कृति, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, युवा विकास एवं जनजागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में भास्कर भौर्याल ने पारंपरिक वाद्य बिणाई और कुमाऊँनी लोकसंगीत की प्रस्तुति दी। अजय वोकल (अजय मिश्रा) ने झोड़ा, छपेली, चांचरी और न्यौली जैसी लोकविधाओं के माध्यम से दर्शकों को लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।
हर्ष काफर ने कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से पहाड़ की स्मृतियों, ग्रामीण जीवन, सामाजिक सरोकारों और पर्यावरणीय चिंताओं को सामने रखा। वहीं इंदु आर्या ने कुमाऊँनी लोकगीतों एवं लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसमें प्रदीप कुँवरबी ने बाँसुरी से संगत की।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण कुमाऊँ के पारंपरिक मार्शल लोकनृत्य ‘सरंकार्स’ की ऊर्जावान प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से वीरता, ऊर्जा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि कर्नल मोहित वर्मा एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य कमलेश जोशी द्वारा सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के साथ अपने अनुभव एवं ज्ञान भी विद्यार्थियों और दर्शकों के साथ साझा किए, जिससे कार्यक्रम सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ-साथ संवाद एवं सीखने का माध्यम भी बना।
पहाड़पन फाउंडेशन की संस्थापक कुसुम लता ने कार्यक्रम की प्रेरणा और अपनी सांस्कृतिक यात्रा के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य कमलेश जोशी ने सभी अतिथियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
‘रूट्स एंड रिदम’ ने यह संदेश दिया कि लोकभाषा हमारी आवाज, लोकगीत हमारी स्मृतियाँ, लोकनृत्य हमारी ऊर्जा और हमारी परंपराएँ हमारी पहचान हैं। आर्मी पब्लिक स्कूल, रानीखेत द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने तथा उत्तराखंड की लोकविरासत को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका श्रीमती आशा बिष्ट ने किया।

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