छावनी परिषद ने आयोजित किया कवि सम्मेलन, विभिन्न रसों की कविताओं के माध्यम से काव्य रस की अनूठी धारा बही, जिसमें श्रोता हुए सराबोर
रानीखेत -छावनी परिषद द्वारा हिंदी पखवाड़ा अंतर्गत बुधवार की देर शाम यहां छावनी इंटर कॉलेज सभागार में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि, कवयित्रियों ने जहां समकालीन मुद्दों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ पर विचारोत्तेजक रचनाएँ प्रस्तुत कीं वहीं सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रहार किया। अपनी कविताओं से रचनाकारों ने श्रोताओं को अंत तक मंत्र मुग्ध किए रखा।
संघर्षपथ पर खड़ी नई पीढ़ी का हौसला बढ़ाते हुए ज्योति साह ने कहा -‘प्रगति के इस दिव्य रथ का,तू सारथी यदुराज बन जा..।’विमल सती ने अपनी रचना में में यह बताते हुए कि रावण के दस सिर आज बाहर नहीं दिखते, बल्कि इंसान के भीतर छिपे विकारों के रूप में आज भी सांस ले रहे हैं,रचना पढ़ी -‘ कौन कहता है कि मर गया दशासन,आज भी जिंदा है चिर अट्टहास के साथ..। उन्होंने अपनी ‘मां का चूल्हा’ कविता भी सुनाई। दिनेश तिवारी ने अपनी पंक्तियो के माध्यम से संदेश दिया इंसान कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसे उन एहसानों और अपनों को नहीं भूलना चाहिए,कहा -‘घर को जाते हुए मत भूलना उन दरख्तों को,जिनकी छांव में पले बढ़े थे..।’ देवकीनंदन कांडपाल ने कविराज पं रामदत्त पंत को श्रद्धांजलि देते हुए कहा-‘सुनो रहने दो माणिक्य शैल पर कालजयी धरा पहनेंगी..।’कृष्ण कुमार सती ने अनोखे व्यक्तित्व से पहचान बनाने वाले विरले लोगों को इंगित करते कहा -‘खासमिजाज से जाने जाते हैं, दुनिया में ऐसे लोग कम हैं..।’ ललित मोहन तिवारी ने हिंदी भाषा को भाव सम्मान देते हुए कुछ इस तरह रचना प्रस्तुत की-‘हिंदी तुझको शब्द समर्पण,कर न सका मैं तन मन अर्पण..।’ हिंदी की महिमा को आगे बढा़ते हुए बालकवि सृष्टि नेगी ने कविता सुनाई -‘हिंदी है भारत की शान, हर दिल की है यह पहचान..।’ गीता जोशी ने रानीखेत के प्रकृति सौंदर्य को शब्दों से निहारते हुए पंक्तियां प्रस्तुत की-‘हवा में घुल गई जैसे कोई मीठी सी बात है..।
डॉ विनीता खाती ने कलम को मन की स्याही में डुबोकर कुछ इस तरह रचना पेश की-‘अपने मन की लेखनी से कुछ शब्द उकेरना चाहती हूं..।’उमा जोशी ने हिंदी भाषा की महिमा को शब्द देते हुए पढ़ा -‘सर्वगुण संपन्न, संपूर्ण आहार, रसों का भंडार, छंदों का आधार,ऐसी है हिंदी..।’ अकेलापन जीवन की कड़वी सच्चाई है और अध्यात्म भी, इस नेहा माहरा ने यूं बयां किया -‘जीवन के हर मोड़ पर इंसान अकेला क्यों रह जाता?परछाई भी साथ न देती..। राजेन्द्र पंत ने पहाड़ की श्रमसाध्य महिलाओं को रचना समर्पित करते हुए कहा-‘आज फिर उन्हें जिंदगी का बोझ सिर पर ढोते देखा है।’
इसके अलावा जयश्री साह ने हमारा उत्तराखण्ड,हमारी शान, इमराना परवीन ने चिट्ठी और मोबाइल के अंतर,गीता पवार भारत मां के वंदन,प्रीति पंत ने नेता की दुश्वारियों, सतीश चन्द्र पाण्डे ने सेना के शौर्य, नरेश चंद्र ने सच से दूर होते समाज, मेघा जोशी ने कर्म पथ चलने का आह्वान, कुणाल ने वर्षा ऋतु,आनन्द अग्रवाल ने यातायात व पर्यावरण जैसे विषयों को अपनी रचनाओं से छूआ।सीमा भाकुनी ने नज़्म अनिल अंश ने ग़ज़ल प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छावनी परिषद के नामित सदस्य मोहन नेगी थे।अध्यक्षता साहित्यकर्मी विमल सती और संचालन छावनी परिषद के राजस्व अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद पंत ने किया।इस अवसर पर छावनी परिषद के स्वच्छता अधीक्षक ए पी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी कमल फर्त्याल, दीप त्रिपाठी, उमेश चन्द्र जोशी, दीपक पंत , अशोक पंत,गौरव भट्ट ,दीपक बिष्ट, रश्मि बिष्ट, सहित अनेक लोग मौजूद रहे।



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