10 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे ग्राम प्रधान, देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान पुलिस से तीखी झड़प

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​देहरादून:​उत्तराखंड भर के ग्राम प्रधान अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। प्रदेश के विभिन्न जिलों से भारी संख्या में राजधानी देहरादून पहुंचे ग्राम प्रधानों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सचिवालय की ओर जोरदार कूच और प्रदर्शन किया।

​सचिवालय कूच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा भारी बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शनकारी प्रधानों ने जब बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस और ग्राम प्रधानों के बीच तीखी झड़प और हल्की तनातनी देखने को मिली।

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​ बता दें कि ​आंदोलनकारी ग्राम प्रधान अपनी कई पुरानी और नई मांगों को लेकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से ग्राम प्रधानों के मासिक मानदेय को बढ़ाकर ₹20,000 प्रति माह करने की मांग की गई है। सांसदों और विधायकों की भांति ग्राम पंचायत स्तर पर भी विकास कार्यों के लिए अलग से ‘प्रधान विकास निधि’ आवंटित करने की मांग रखी गई। पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट की लचर व्यवस्था और नेटवर्क की समस्या को देखते हुए ‘जी.आर.एस.वाई’ (ग्राम रोजगार योजना) से जुड़े कार्यों का संचालन पूरी तरह से ऑफलाइन माध्यम से करने की अनुमति की मांग रखी गई है। पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केवल जनसंख्या के बजाय भौगोलिक विषमताओं के आधार पर बजट आवंटन का नियम बनाने की बात कही गई है।

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​ गौरतलब है अपनी अनदेखी से नाराज ग्राम प्रधान संगठन ने पूर्व में ही विरोध की चेतावनी दी थी। इसके तहत अपनी लंबित मांगों के समर्थन में प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों ने गत 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण ‘जीपीडीपी’ (ग्राम पंचायत विकास योजना) की बैठकों का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था।

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​प्रधान संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में ग्राम पंचायतें विकास की पहली कड़ी हैं, लेकिन संसाधनों और मानदेय के अभाव में वे जनहित के कार्य सुचारू रूप से नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।

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