राज्य आंदोलनकारी की गुमनाम मृत्यु; तंगी , तन्हाई, गुमनामी में जिया जीवन, अंत्येष्टि के समय रहे कुल जमा सात लोग
रानीखेत – उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए सतत् संघर्षरत रहे डॉ लक्ष्मण सिंह खनका गत शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। डॉ खनका का जीवन अभाव और उपेक्षा का शिकार रहा। कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और बाद में उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक डॉ डी डी पंत के शिष्य रहे डॉ खनका ने राज्य बनने के बाद गुमनामी भरी जिंदगी को जिया , यहां तक कि उन्हें राज्य आंदोलनकारी पेंशन तक मुहैया नहीं हुई।
इस दुनिया में कुछ लोग थोड़ा सा काम करके भी नाम और दाम कमा लेते हैं जबकि कुछ लोग बहुत करने के बाद भी अंधेरे में रह जाते हैं।राज्य निर्माण के लिए समर्पित डॉ खनका राज्य निर्माण की लडा़ई के ऐसे ही उन चंद सिपाहियों में थे जिन्होंने राज्य निर्माण के बाद तंगी और गुमनामी भरी जिंदगी बिताई। व्यवस्था की उपेक्षा का शिकार डा खनका दशकों तक आर्थिक तंगी (मुफलिसी) और प्रचार से दूर (गुमनामी) जीवन जीने पर मजबूर हुए। कुछ समय के लिए उन्होंने मीना बाजार की खोखा लाइन में आजीविका के लिए खोखा चलाया तो कभी वे जंगल में बकरी नजर आते थे। डॉ खनका प्रतिभाशाली व्यक्ति थे उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल से भूगोल विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की थी। उन्होंने जीवन को अत्यंत सादगी और सौम्यता के साथ जिया। सरकार ही नहीं राज्य आंदोलन के अलम्बरदार होने का दम भरने वाले सियासती दलों की अनदेखी के कारण भी डा खनका गरीबी, गुमनामी और तन्हाई का जीवन जीने को विवश हुए यहां तक कि उन्हें राज्य आंदोलनकारी की पेंशन तक मुहैया नहीं हुई जबकि पेंशन लपकने में अनेक फर्जी आंदोलनकारी तक सत्ता की नजदीकियों का लाभ उठा गए।
डा खनका की अंतिम वक्त तक उपेक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार को मुक्ति धाम रानीखेत में उनकी अंत्येष्टि के वक्त कुल जमा सात लोग ही मौजूद रहे।उनकी चिता को उनके भाई और भतीजे ने मुखाग्नि दी। ऐसे में समाज की चुप्पी हैरान करने वाली रही।

रविवार को सुभाष चौक में एक शोकसभा का आयोजित कर डा लक्ष्मण सिंह खनका को श्रद्धांजलि दी गई।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सरकार और सियासतदानों ने तो उनकी उपेक्षा की ही, समाज भी उनके प्रति अनभिज्ञ बना रहा और इस प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति का जीवित रहते सम्मान नहीं कर पाया जिसके वे हकदार थे। श्रद्धांजलि सभा में छावनी परिषद के नामित सदस्य मोहन नेगी, एडवोकेट दिनेश तिवारी, श्री नन्दा सुनन्दा सेवा समिति संरक्षक हरीश लाल साह, हरीश हर्बोला, वीर सिंह, कुबेर सिंह आदि मौजूद रहे।

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