रानीखेत में व्यापार मंडल चुनाव प्रक्रिया से उपजा विवाद बना आंतरिक असंतोष का कारण, जिला अध्यक्ष व महामंत्री ने दिया त्याग पत्र

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रानीखेत- रानीखेत में व्यापार मंडल चुनाव प्रक्रिया से उपजा विवाद आंतरिक असंतोष का कारण बन चुका है। चुनाव प्रक्रिया को व्यक्तिगत स्वार्थ और हठधर्मिता से बाधित कराए जाने से क्षुब्ध प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष मोहन नेगी और जिला महामंत्री आर पी पांडे ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

प्रांतीय नेतृत्व को त्याग पत्र भेजने से पूर्व,पदाधिकारी द्वय ने यहां साझी पत्रकार वार्ता में कहा कि व्यापारिक हितों की अनदेखी कर व्यक्तिगत और राजनीतिक स्वार्थों के चलते चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने विगत 36 वर्षों में प्रांतीय पदाधिकारियों, जिला व नगर इकाइयों तथा वरिष्ठ व्यापारियों से मिले सहयोग के लिए आभार भी जताया। कहा कि इस दौरान व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए गए। फूड लाइसेंस, बाट-माप, खाद्य पंजीकरण, फेरी वालों की समस्या समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर संबंधित विभागों और शासन-प्रशासन को ज्ञापन भेजे गए ‌।

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अपने कार्यकाल की उपलब्धियां पेश करते हुए उन्होंने कहा कि
जिला संगठन ने जिले में 17 व्यापारिक इकाइयों का गठन कर उन्हें संगठन से जोड़ा। व्यापारियों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर रानीखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, स्याल्दे, कफड़ा, बग्वालीपोखर और देघाट में जिला सम्मेलन आयोजित किए गए। व्यापारिक आंदोलनों और व्यापारियों के योगदान को स्मारिका के माध्यम से भी सामने लाया गया। उन्होंने कहा कि लगातार गिरते व्यापार और पर्यटकों की घटती आमद को देखते हुए कैंचीधाम में बढ़ते जाम के खिलाफ बाईपास निर्माण की मांग को लेकर जनआंदोलन किया गया। मुख्यमंत्री और शासन-प्रशासन को भी ज्ञापन भेजे गए।

पदाधिकारी द्वय ने बताया कि रानीखेत नगर के छह चुनाव अब तक मत प्रणाली के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न कराए जा चुके हैं। इस बार भी व्यापारियों का पंजीकरण कर मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई थी और आपत्तियां आमंत्रित करने के बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित कर नामांकन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी।नामांकन वापसी के अंतिम दिन कुछ व्यापारियों ने नामांकनों पर आपत्ति जताते हुए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग की। इसके बाद चुनाव समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और एक सदस्य ने त्यागपत्र दे दिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया बाधित हो गई।

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उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी प्रांतीय संगठन को दी गई, जिसके निर्देश पर चुनाव स्थगित कर दिया गया। कई स्तरों पर जांच और पर्यवेक्षकों के प्रयासों के बावजूद विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। दोनों नेताओं ने कहा कि रानीखेत में छावनी के नियमों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुनाव समिति के बायलॉज के अनुसार चुनाव होते रहे हैं। मौजूदा विवादों में प्रांतीय निर्देशों का भी धरातल पर ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। ऐसे में व्यापारियों की एकता और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारिक हितों के बजाय कुछ लोगों के निजी और राजनीतिक स्वार्थों के चलते चुनाव नियमों और चुनाव प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। इसी कारण वे अपना त्यागपत्र प्रांतीय अध्यक्ष को प्रेषित कर रहे हैं।

उन्होंने वर्ष 1994 का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त दो व्यापारिक संगठन बनने से व्यापारियों की समस्याओं के समाधान में परेशानी आई थीं। उस स्थिति को देखते हुए तत्कालीन वरिष्ठ व्यापारियों और उनके प्रयासों से नामांकन वापस लेकर पांच बुजुर्ग व्यापारियों को निर्विरोध पदाधिकारी बनाया गया था। उन्होंने कहा कि आज फिर हठधर्मिता और व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थों के कारण चुनाव बाधित होना व्यापारिक एकता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

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